Kayar mat Ban PUC 2nd year (Sahitya Gaurav) Karnataka Board/Summary/Question & Answer (कायर मत बन ...सारांश व प्रश्नोंत्तर)
कायर मत बन
नरेंद्र शर्मा
कवि परिचय :
* जन्म 1913 ई. में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के जहाँगीरपुर नामक गाँव में हुआ।
* आपने 1936 में प्रयागराज विश्वविद्यालय से एम.ए. की शिक्षा प्राप्त की।
* स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने से जेल यात्रा भी करनी पड़ी।
* 1954 ई. में मुंबई के आकशवानी केंद्र में ‘विविध भारती’ कार्यक्रम के संचाल्क नियुक्त हुए।
रचनाएँ :
* प्रभातफ़ेरी, शूल-फ़ूल, प्रवासी के गीत, पलाश वन, मिट्टी और फ़ूल, कदली वन, हंसमाला, रक्तचंदन, बहुत रात रोये, द्रौपदी, उत्तरजय, सुवर्णा आदि।
कविता का भावार्थ :
कुछ भी बन बस कायर मत बन... तेरी राह रोकते पाहन।
भावार्थ: कवि कहते हैं कि ज़िंदगी में तुम चाहे जो कुछ भी बनो, लेकिन कभी डरपोक या कायर मत बनना। मुश्किलों से घबराकर पीछे मत हटो। तुम्हारे रास्ते में 'पाहन' यानी पत्थर जैसी बड़ी-बड़ी रुकावटें आएँगी, उनसे टकराओ। अपनी मंज़िल पाने के लिए उन रुकावटों को ठोकर मारो, उनके सामने अपना माथा पटककर हार मत मानो।
ले-देकर जीना क्या जीना? ... रे मनुष्य-बस कातर क्रंदन?
भावार्थ: कवि कहते हैं कि समझौते की ज़िंदगी भी क्या कोई ज़िंदगी है? अपनी दुखों को चुपचाप सहना और 'गम के आँसू पीना' ठीक नहीं है। मानवता ने तुम्हें युगों तक अपना खून-पसीना बहाकर सींचा (बड़ा किया) है। ऐसे में क्या तुम सिर्फ कातर क्रंदन (बेचारों की तरह रोना) करोगे? रोने से कुछ हासिल नहीं होगा, हिम्मत दिखानी होगी।
युद्धं देहि कहे जब पामर... पर कायरता अधिक अपावन।
भावार्थ: जब कोई दुष्ट या नीच व्यक्ति तुम्हें युद्ध के लिए ललकारे, तो पीठ दिखाकर मत भागो। या तो तुम उसे प्यार (प्रीति) से जीत लो, या फिर अपनी ताकत से उसे इतना मजबूर कर दो कि वह तुम्हारे पैरों में गिर पड़े। कवि का मानना है कि बदला लेना (प्रतिहिंसा) कमजोरी हो सकती है, लेकिन डरकर चुप बैठ जाना (कायरता) सबसे ज्यादा अपवित्र और बुरा काम है।
तेरी रक्षा का न मोल है... कर न दुष्ट को आत्मसमर्पण।
भावार्थ: तुम्हारी खुद की रक्षा से कहीं ज़्यादा कीमती तुम्हारी 'इंसानियत' है। इंसान खुद मिटकर भी दूसरों के लिए कुछ अच्छा कर जाता है, यही सबसे बड़ा सच है। कवि कहते हैं कि अपना सब कुछ मानवता के भले के लिए न्योछावर कर दो, लेकिन किसी बुरे या दुष्ट इंसान के सामने कभी भी घुटने मत टेको (आत्मसमर्पण मत करो)। बस, कायर मत बनो।
इस कविता में कवि ने यह समझाने का प्रयास किया है कि हक के लिए लड़ना और स्वाभिमान से जीना ही असली मनुष्यता है।
मुहावरे : गम के आँसू पीना - दुख दर्द सहना।
वाक्य में प्रयोग : जिंदगी में सफ़ल होना है तो गम के आँसू पीकर मत बैठो, बल्कि समस्याओं का सामना करो।
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Kayar Mat Ban Poem Full Explanation As per Board Exam
प्रश्नोंत्तर :
एक शब्द या वाक्यांश या वाक्य में उत्तर लिखिए :
1. कवि नरेंद्र शर्मा क्या न बनने का संदेश देते हैं?
उत्तर: कवि 'कायर' (डरपोक) न बनने का संदेश देते हैं।
2. कौन राह रोकता है?
उत्तर: पत्थर (पाहन) यानी जीवन की मुश्किलें राह रोकती हैं।
3. कवि नरेंद्र शर्मा के अनुसार मनुष्य को किसने सींचा है?
उत्तर: मनुष्य को 'मानवता' ने अपने खून-पसीने से सींचा है।
4. कवि नरेंद्र शर्मा मनुष्य को किसके बल पर जीतने को कहते हैं?
उत्तर: कवि मनुष्य को 'प्रीति' (प्यार) के बल पर या अपनी शक्ति के बल पर जीतने को कहते हैं।
5. कवि नरेंद्र शर्मा के अनुसार प्रतिहिंसा क्या है?
उत्तर: कवि के अनुसार प्रतिहिंसा (बदला लेना) एक तरह की दुर्बलता या कमजोरी है।
6. कवि नरेंद्र शर्मा ने किसे अधिक अपावन कहा है?
उत्तर: कवि ने 'कायरता' को सबसे अधिक अपावन (अशुद्ध/बुरा) कहा है।
7. कवि नरेंद्र शर्मा किसके सामने आत्मसमर्पण न करने के लिए कहते हैं?
उत्तर: कवि 'दुष्ट' व्यक्ति के सामने कभी भी आत्मसमर्पण न करने के लिए कहते हैं।
II. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
1. 'कायर मत बन' कविता के द्वारा कवि हमें क्या संदेश देते हैं?
उत्तर: कवि हमें यह संदेश देना चाहते हैं कि इंसान को कभी भी मुश्किलों से डरकर पीछे नहीं हटना चाहिए। वे कहते हैं कि रोने या दुख सहने से कुछ नहीं होगा, बल्कि हमें बाधाओं को ठोकर मारकर आगे बढ़ना चाहिए। कवि का संदेश है कि स्वाभिमान के साथ जियो और समझौतावादी मत बनो।
2. कवि नरेंद्र शर्मा ने प्रतिहिंसा और कायरता के संबंध में क्या कहा है?
उत्तर: कवि कहते हैं कि अगर आप किसी से बदला लेते हैं (प्रतिहिंसा), तो वह आपकी मानसिक कमजोरी दिखा सकता है। लेकिन, डर के मारे चुप बैठ जाना या 'कायर' बन जाना उससे भी बड़ी बुराई है। कायरता इंसान के व्यक्तित्व को अपवित्र कर देती है, इसलिए लड़ना बेहतर है पर डरना नहीं।
3. मानवता के प्रति कवि नरेंद्र शर्मा के विचार प्रकट कीजिए।
उत्तर: कवि की नजर में मानवता सबसे ऊपर है। वे कहते हैं कि इंसान को मानवता ने सदियों के खून-पसीने से संवारा है। हमारा जीवन अनमोल है और इसे हमें मानवता की भलाई के लिए न्योछावर (अर्पण) कर देना चाहिए। इंसान को खुद को मिटाकर भी मानवता की रक्षा करनी चाहिए, लेकिन गलत के आगे झुकना नहीं चाहिए।
‘एक वृक्ष की हत्या’ कविता का सारांश और सरल भाषा में लिखे हुए सटिक प्रश्नों के उत्तर पढ़ने के लिए नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करें :
एक वृक्ष की हत्या कविता का भावार्थ और प्रश्नोंत्तर
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