KAR CHALE HUM FIDA NCERT Course B Class-10 Solutions & Summary .. (कर चले हम फ़िदा भावार्थ/Question answers ... FULL MARKS)
कर चले हम फ़िदा
कैफ़ी आज़मी
कवि परिचय -
* कैफ़ी आज़मी का वास्तविक नाम अतहर हुसैन रिज़वी है।
* जन्म- १९ जनवरी १९१९ उत्तरप्रदेश के आज़मगढ़ जिले मजमां गाँव में हुआ।
* इनका पूरा परिवार कला क्षेत्र से जुड़ा था।
भावार्थ :
प्रस्तुत पंक्तियों में एक बलिदानी सैनिक के अंतिम संदेश का चित्रण है। सैनिक देशवासियों को संबोधित करते हुए कहता है कि हमने अपने प्राण और अपना यह नश्वर शरीर राष्ट्र की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया है। अब हमारे जीवन की यात्रा समाप्त हो रही है, अतः हम इस मातृभूमि की सुरक्षा का पावन दायित्व आप देशवासियों को सौंप रहे हैं। सैनिक उन कठिन परिस्थितियों का स्मरण करता है जब सीमा पर भीषण शीत के कारण रक्त जमने लगा था और श्वास अंतिम पड़ाव पर थी, किंतु फिर भी हमारे साहस में कोई कमी नहीं आई। हमने हिमालय के गौरव को कभी झुकने नहीं दिया और अंतिम क्षण तक शत्रु का डटकर सामना किया।
सैनिक कहता है कि यद्यपि संसार में जीवित रहने और जीवन का आनंद लेने के अनेक अवसर प्राप्त होते हैं, किंतु अपनी मातृभूमि के लिए प्राणों की आहुति देने का सौभाग्य विरले ही प्राप्त होता है। वास्तविक युवावस्था वही है जो राष्ट्र की वेदी पर अपने रक्त का अर्पण कर सके। सैनिक ने मृत्यु को एक उत्सव माना है और धरती को उस वधू के समान देखा है जिसके मस्तक पर उसने अपने रक्त से विजय का तिलक लगाया है। उसका आह्वान है कि बलिदान की यह श्रृंखला (काफिला) कभी रुकनी नहीं चाहिए। विजय का वास्तविक उत्सव तभी सार्थक है जब हम मृत्यु के भय को त्याग कर राष्ट्र-रक्षा के पथ पर निरंतर आगे बढ़ते रहें।
अंतिम पंक्तियों में सैनिक देश के युवाओं को मर्यादा और शौर्य का स्मरण कराता है। वह कहता है कि जिस प्रकार लक्ष्मण ने सीता माता की रक्षा हेतु रेखा खींची थी, उसी प्रकार तुम्हें भी अपने रक्त से देश की सीमाओं पर एक अभेद्य सुरक्षा रेखा खींच देनी चाहिए, ताकि कोई भी शत्रु रूपी रावण हमारी सीमा का उल्लंघन न कर सके। यदि कोई अपवित्र हाथ भारत माता के आँचल को स्पर्श करने का दुस्साहस करे, तो उसे खंडित कर दो। सैनिक स्पष्ट संदेश देता है कि अब तुम ही इस देश के 'राम' हो और तुम ही 'लक्ष्मण' हो। राष्ट्र की अस्मिता और मर्यादा की रक्षा का संपूर्ण भार अब तुम्हारे ही सबल कंधों पर है।
प्रश्न -अभ्यास
क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
१. क्या इस गीत की कोई ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है?
उत्तर- हाँ, इस गीत की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है। १९६२ में भारत और चीन के बीच हुए युद्ध को ध्यान में रखकर इस गीत को लिखा गया था। चीन और भारत के इस युद्ध में भारत की हार हुई थी लेकिन भारत के जवानों ने चीन के सिपाहियों को मुँहतोड़ ज़वाब दिया था।
२. ‘सर हिमालय का हमने न झुकने दिया’ , इस पंक्ति में हिमालय किस बात का प्रतीक है?
उत्तर- ‘हिमालय’ संपूर्ण भारतीयों के मान-सम्मान का प्रतीक है। हिमालय प्रदेश में दुश्मन देशों द्वारा हमला करना मतलब भारतीयों के सम्मान को ठेस पहुँचाना है। हमारे देश के जवान इन पर्वतीय क्षेत्रों में हर मौसम में सुरक्षा के लिए तैनात रहते हैं। उन्होंने १९६२ में चीन के साथ हुए युद्ध में देश की रक्षा करते हुए अपनी जान दी लेकिन पीछे नहीं हटे। उन्होंने देश के लिए अपना सिर कटवाया लेकिन दुश्मनों के आगे झुके नहीं।
३. इस गीत में धरती को दुल्हन क्यों कहा गया है?
उत्तर- इस गीत में धरती को दुल्हन कहा गया है क्योंकि हमारे देश की धरती दुल्हन की तरह सजी-धजी और सुंदर देखने मिलती है। चारों ओर की हरियाली, सुंदर-सुंदर खिले फ़ूल, मोतियों से बहते झरने, बर्फ़ीले पहाड़ तथा दूध से बहती हुई नदियाँ आदि अनेक सुंदर दृश्य देखने पर धरती उस नई-नयेली दुल्हन के समान सुंदर दिखती है। उसपर चीन के साथ हुए युद्ध में हमारे जवानों के खून से जब यह लाल हुई, तो ऐसे लगने लगी जैसे इस धरती रुपी दुल्हन ने लाल शादी का जोड़ा पहना हो।
४. गीत में ऐसी क्या खास बात होती है कि वे जीवन भर याद रह जाते हैं ?
उत्तर- मन के भावों की मौखिक अभिव्यक्ति मतलब ही गीत है। गीत में वह भावनाएँ होती हैं जो मन में लंबे समय तक घर कर बैठती है। सूर, ताल तथा लय से गीत एक सुनने वाले के हृदय में जीवन भर याद बनकर रह जाता है। गीत में एक गीतकार ऐसे शब्दों की रचना करता है जो सुनने वालों के दिलो-दिमाग पर गहरा भावनात्मक प्रभाव डालता है। गीत से व्यक्त भावनाएँ सीधे दिल पर असर करती हैं इसलिए ये जीवन भर याद रह जाते हैं।
५. कवि ने साथियों संबोधन का प्रयोग किसके लिए किया है ?
उत्तर- कवि ने साथियों संबोधन का प्रयोग संपूर्ण भारतवासियों के लिए तथा युद्ध में बचे सिपाहियों के लिए किया है। युद्ध में घायल सिपाही अपने अंतिम समय में बाकी सिपाही तथा भारतवासियों को मानो संबोधित करते हुए कह रहे हो कि “हमने अपना कर्तव्य निभाया है। हे! साथियों अब यह वतन आपके हवाले कर रहे हैं। अब आपकी बारी है इस देश की सुरक्षा के लिए आगे आने की।”
६. कवि ने इस कविता में किस काफ़िले को आगे बढ़ाते रहने की बात कही है?
उत्तर- कवि ने इस कविता में मौत के काफ़िले को आगे बढ़ाते रहने की बात की है। दुश्मन के साथ लड़ते हुए अगर एक सैनिकों का काफ़िला (समूह) खत्म हो जाता है, तो उसके स्थान पर दूसरा काफ़िला तैयार रहना चाहिए ताकि दुश्मन हमारे देश के अंदर कदम ना रख सके।
७. इस गीत में ‘सर पर कफ़न बाँधना’ किस ओर संकेत करता है?
उत्तर- इस गीत में कवि ने ‘सर पर कफ़न बाँधना’ इस मुहावरे का प्रयोग किया है इसका अर्थ है- मरने के लिए तैयार रहना। भारत के जवान अपने देश की रक्षा करने के लिए हमेशा अपने सर पर कफ़न बाँधे रहते हैं। कवि इसके द्वारा यही संकेत देना चाहते हैं कि हमें अपनी जन्मभूमि की रक्षा के लिए मौत को भी गले लगाना पड़े तो भी हमें पीछे नहीं हटना चाहिए। अपने देश की रक्षा करना हर एक भारतीय का पहला कर्तव्य होना चाहिए।
८. इस कविता का प्रतिपाद्य अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर- इस कविता में कवि भारतवासियों के मन में देशभक्ति की भावना निर्माण करते हैं। हर एक भारतवासी को अपने देश की सुरक्षा और उसके मान-समान की रक्षा के लिए हमेशा अग्रसर रहना चाहिए। हमारे देश के जवान देश की सीमा पर खड़े होकर दुश्मनों से देश की रक्षा करते समय अपने प्राणों का बलिदान देने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं । खराब मौसम में भी वह सीमा पर डटे रहते हैं। हमारे इन वीर जवानों के कारण ही हमारी इस सीता के समान पवित्र धरती का दामन रावण रुपी दुश्मन भी नहीं छु सकता। हमारी यह धरती दुल्हन के समान सुंदर तभी बनी रहेगी जब हर एक भारतीय अपना कर्तव्य समझकर देश की रक्षा करने के लिए आगे आएगा।