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Ek Vriksh ki Hatya PUC 2nd year (Sahitya Gaurav) Karnataka Board/Summary/Question & Answer ( एक वृक्ष की हत्या ...सारांश व प्रश्नोंत्तर)

                                                                        एक वृक्ष की हत्या

                                                                                            कुँवर नारायण

कवि परिचय :

जीवन एवं शिक्षा: 

हिंदी साहित्य के शिखर पुरुष कुँवर नारायण जी का जन्म 19 सितंबर 1927 को उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में हुआ था। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की, जहाँ से उन्होंने वर्ष 1951 में अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. की डिग्री हासिल की। उनके वैचारिक दृष्टिकोण और साहित्य सृजन पर आचार्य कृपलानी तथा श्री नरेंद्र देव जैसे महान व्यक्तित्वों का गहरा प्रभाव पड़ा।

साहित्यिक यात्रा और कृतियाँ: 

उनकी काव्य यात्रा का आरम्भ 'चक्रव्यूह' (1956) से हुआ, जिसे हिंदी कविता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। उनकी प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं:

  • काव्य संग्रह: 'परिवेश', 'अपने सामने', 'कोई दूसरा नहीं', 'इन दिनों' आदि।

  • प्रबंध काव्य: 'आत्मजयी' और 'वाजश्रवा के बहाने'।

  • कहानी संग्रह: 'आकारों के आसपास' (1973)।

सम्मान और उपलब्धियाँ: 

साहित्य के प्रति उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें देश के प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया:

  1. ज्ञानपीठ पुरस्कार (2005): संपूर्ण साहित्य के लिए।

  2. पद्मभूषण (2009): भारत सरकार द्वारा प्रदान किया गया।

  3. इसके अतिरिक्त उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार और कबीर सम्मान से भी सम्मानित किया गया।

कविता का सारांश :

'एक वृक्ष की हत्या' पर्यावरण संरक्षण और मनुष्य की संवेदनाओं को जगाने वाली एक बहुत ही मार्मिक कविता है।इस कविता में कवि एक पुराने पेड़ के कट जाने पर अपना दुख व्यक्त करते हैं। कवि जब कुछ दिनों बाद अपने घर लौटते हैं, तो उन्हें वह पुराना पेड़ वहाँ नहीं मिलता जो हमेशा उनके घर के दरवाजे पर एक 'बूढ़े चौकीदार' की तरह तैनात रहता था।

कवि उस पेड़ का वर्णन एक जीवित व्यक्ति के रूप में करते हैं। पेड़ की सूखी टहनी उसकी राइफल जैसी थी, उसकी छाल पुराने चमड़े जैसी सख्त थी और ऊपर की पत्तियां उसकी पगड़ी के समान थीं। वह धूप, छाँव और हर मौसम में निडर होकर खड़ा रहता था। कवि का उस पेड़ से गहरा लगाव था; जब भी वे आते, उन्हें ऐसा लगता जैसे पेड़ उनसे पूछ रहा हो— "तुम कौन हो?" और कवि प्यार से जवाब देते— "दोस्त।"

अंत में कवि एक बहुत बड़ी चेतावनी देते हैं। वे कहते हैं कि हमें केवल पेड़ ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता और प्रकृति को बचाना है। यदि पेड़ कटते रहे, तो नदियाँ नाला बन जाएँगी, हवा जहरीली हो जाएगी और जंगल मरुस्थल (रेगिस्तान) में बदल जाएँगे। सबसे डरावनी बात यह है कि अगर प्रकृति नष्ट हो गई, तो इंसान भी 'जंगली' या संवेदनहीन हो जाएगा।

I. एक शब्द या वाक्य में उत्तर दीजिए:

1. कवि ने बूढ़ा चौकीदार किसे कहा है?

उत्तर: कवि ने अपने घर के बाहर स्थित पुराने वृक्ष (पेड़) को बूढ़ा चौकीदार कहा है।

2. वृक्ष का शरीर किससे बना है?

उत्तर: वृक्ष का शरीर पुराने और सख्त चमड़े (छाल) से बना है।

3. सूखी डाल कैसी है?

उत्तर: वृक्ष की सूखी डाल एक राइफल के समान दिखाई देती है।

4. वृक्ष की पगड़ी कैसी है?

उत्तर: वृक्ष की पगड़ी फूल-पत्तियों से भरी हुई है।

5. देश को किससे बचाना है?

उत्तर: देश को देश के दुश्मनों से बचाना है।

6. हवा को क्या हो जाने से बचाना है?

उत्तर: हवा को धुआँ हो जाने से बचाना है।

7. जंगल को क्या हो जाने से बचाना है?

उत्तर: जंगल को मरुस्थल (रेगिस्तान) हो जाने से बचाना है।

II. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए:

1. वृक्ष न दिखने पर कवि उसकी यादों में कैसे खो गये?

उत्तर: जब कवि घर लौटे और उन्होंने उस पुराने पेड़ को वहाँ नहीं पाया, तो उन्हें उसकी पूरी आकृति याद आने लगी। उन्हें याद आया कि वह कैसे हमेशा खाकी वर्दी पहने, सिर पर फूलों की पगड़ी बाँधे और कंधे पर सूखी टहनी की राइफल लिए मुस्तैद रहता था। उन्हें वह पल याद आए जब वे उस पेड़ की ठंडी छाँव में बैठकर सुस्ताया करते थे।

2. वृक्ष की महत्ता पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: वृक्ष हमारे जीवन का आधार हैं। वे न केवल हमें छाया और फल देते हैं, बल्कि एक रक्षक की तरह वातावरण को संतुलित रखते हैं। वे हवा को शुद्ध करते हैं और पर्यावरण को रेगिस्तान बनने से रोकते हैं। इस कविता में वृक्ष को एक 'दोस्त' और 'चौकीदार' के रूप में दिखाकर उसकी मानवीय और प्राकृतिक महत्ता बताई गई है।

3. पर्यावरण के संरक्षण के संबंध में कवि कुँवर नारायण के विचार लिखिए।

उत्तर: कवि का मानना है कि पर्यावरण का विनाश मानवता का विनाश है। वे चेतावनी देते हैं कि यदि हमने पेड़ों को काटना बंद नहीं किया, तो हमारी नदियाँ सूखकर गंदे नाले बन जाएँगी और हवा में जहर घुल जाएगा। वे कहते हैं कि हमें घर, शहर और देश को लुटेरों से बचाने के साथ-साथ प्रकृति को भी बचाना होगा, वरना इंसान का अस्तित्व ही संकट में पड़ जाएगा।


1. "अबकी घर लौटा तो देखा वह नहीं था– वही बूढ़ा चौकीदार वृक्ष..."

संदर्भ: ये पंक्तियाँ कुँवर नारायण द्वारा रचित कविता 'एक वृक्ष की हत्या' से ली गई हैं।

भावार्थ: कवि कहते हैं कि जब वे काफी समय बाद अपने घर वापस आए, तो उन्हें वह पुराना पेड़ वहाँ नहीं मिला जो हमेशा उनके दरवाजे पर खड़ा रहता था। कवि ने उस पेड़ को 'बूढ़ा चौकीदार' कहा है क्योंकि वह वर्षों से अडिग रहकर घर की रखवाली कर रहा था। इन पंक्तियों में कवि का उस पेड़ के प्रति गहरा लगाव और उसके कट जाने का गहरा दुख झलकता है। उन्हें ऐसा महसूस होता है जैसे उनके परिवार का कोई बुजुर्ग सदस्य या कोई वफादार रक्षक गायब हो गया है।

2. "दरअसल शुरू से ही था हमारे अंदेशों में कहीं एक जानी दुश्मन..."

संदर्भ: ये पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक 'साहित्य गौरव' की कविता 'एक वृक्ष की हत्या' से ली गई हैं।

भावार्थ: यहाँ कवि एक बहुत ही कड़वी सच्चाई की ओर इशारा कर रहे हैं। वे कहते हैं कि हमें हमेशा से यह डर (अंदेशा) था कि कोई न कोई 'जानी दुश्मन' इस पेड़ को नुकसान पहुँचाएगा। यह दुश्मन और कोई नहीं, बल्कि इंसान का लालच और विकास की अंधी दौड़ है।

कवि आगे समझाते हैं कि हमें केवल अपने घर को लुटेरों से या शहर को हमलावरों (नादिरों) से ही नहीं बचाना है, बल्कि हमें अपनी प्रकृति को भी बचाना है। यदि हम पर्यावरण को नहीं बचाएंगे, तो लुटेरे हमारा धन ले जाएंगे, लेकिन पर्यावरण का विनाश हमारा जीवन ही छीन लेगा। इसलिए वे घर, शहर और देश के साथ-साथ प्रकृति की रक्षा करने की बात करते हैं।


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