Kabeer ki Sakhi/Class 10 /NCERT/Question Bank as per CBSE board Pattern (कबीर की साखी... महत्वपूर्ण प्रश्नोंत्तर/Test Paper )
साखी
कबीर
नोट -
* बोर्ड परीक्षा में कबीर की साखी पर १ या २ अंकों के लिए प्रश्न पूछे जाते हैं इसलिए लंबे उत्तर लिखने की कोशिश करने की जरुरत नहीं है।
* कबीर की साखी पर पठीत पद्यांश भी दिया जा सकता है जिसके ऊपर ५ अंकों के लिए बहुपर्यायी प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
* बोर्ड परीक्षा पेपर को ध्यान में रखकर यह प्रश्न बनाये गए हैं।
1. बहुपर्यायी प्रश्न या एक वाक्य में उत्तर लिखें। (एक अंक के लिए पूछे जाने वाले प्रश्न)
१. कबीर का जन्म कहाँ हुआ?
उत्तर - कबीर का जन्म काशी में हुआ।
२. कबीर की मृत्यु कहाँ हुई?
उत्तर : कबीर की मृत्यु मगहर में हुई।
३. कबीर का जन्म कब हुआ?
उत्तर : कबीर का जन्म 1398 में हुआ।
४. कबीर की आयु कितने वर्ष थी?
उत्तर : कबीर की आयु 120 वर्ष थी।
५. कबीर की कैसी सोच के कवि थे?
उत्तर : कबीर क्रांतदर्शी सोच के कवि थे।
६. कबीर ने किस भगवान को माना है?
उत्तर : कबीर ने निर्गुण राम को माना है।
७. कबीर किन बातों का विरोध करते थे?
उत्तर : कबीर बाह्याडंबरों का विरोध करते थे।
८ कबीर किस ज्ञान को अधिक महत्व देते थे?
उत्तर : कबीर शास्त्रीय ज्ञान की अपेक्षा अनुभव ज्ञान को महत्व देते थे।
९. कबीर भगवान के किस रुप को मानते थे?
उत्तर : कबीर भगवान के निर्गुण रुप को मानते थे।
१०. कबीर की भाषा को किस नाम से जाना जाता था?
उत्तर: कबीर की भाषा को सधुक्कड़ी और पंचमेल खिचड़ी के नाम से जाना जाता था।
११. साखी शब्द किस तत्सम शब्द से बना है?
उत्तर : साखी शब्द ‘साक्षी’ इस तत्सम शब्द से बना है।
१२. साक्षी शब्द किस धातु रुप से बना है?
उत्तर : साक्षी शब्द ‘साक्ष्य’ इस मूल धातु रुप से बना है।
१३. साक्षी शब्द का अर्थ क्या है?
उत्तर : साक्षी शब्द का अर्थ प्रत्यक्ष ज्ञान है।
१४ . प्रत्यक्ष ज्ञान कौन शिष्य को प्रदान करता है?
उत्तर : प्रत्यक्ष ज्ञान गुरु शिष्य को प्रदान करता है।
१५. संत संप्रदाय में शास्त्रीय ज्ञान की अपेक्षा किसको अधिक महत्व है?
उत्तर: संत संप्रदाय में शास्त्रीय ज्ञान की अपेक्षा अनुभव ज्ञान को अधिक महत्व है।
१६. कबीर की भाषा में कौन-सी भाषाओं का मिश्रण पाया जाता है?
उत्तर : कबीर की भाषा में राजस्थानी, अवधी, पंजाबी और भोजपुरी भाषाओं का मिश्रण पाया जाता है।
१७. साखी किस छंद में लिखी गई है?
उत्तर: साखी दोहा छंद में लिखी गई है।
१८. कबीर के अनुसार कैसी वाणी बोलनी चाहिए?
उत्तर : कबीर के अनुसार मधुर वाणी बोलनी चाहिए।
१९. मधुर वाणी किसे समाप्त करती है?
उत्तर : मधुर वाणी अहंकार को समाप्त करती है।
२०. कस्तूरी क्या है?
उत्तर : कस्तूरी एक सुगंधित पदार्थ है जो मृग की नाभी में होता है।
२१. मृग वन में क्या ढूँढ़ती है?
उत्तर : मृग वन में कस्तूरी ढूँढ़ती है।
२२. मनुष्य के पास क्या होने से भगवान की प्राति नहीं हो सकती?
उत्तर : मनुष्य के पास मैं या अहंकार की भावना होने से हरि की प्राप्ति नहीं हो सकती।
२३. कबीर के अनुसार अज्ञान रुपी अँधेरा कब मिट सकता है?
उत्तर : कबीर के अनुसार अँधेरा ज्ञान रुपी दीपक के जलने से मिट सकता है।
२४. संसार सुखी क्यों है?
उत्तर : संसार खाने और सोने के कारण सुखी है।
२५. कबीर क्यों दुखी है?
उत्तर : प्रभु मिलन न होने के कारण जागने और रोने से दुखी है।
२६. विरह किसके बराबर है?
उत्तर : विरह साँप के डसने के बराबर है।
२७. राम के वियोग में मनुष्य कैसा हो जाता है?
उत्तर : राम के वियोग में मनुष्य पागल (बौरा) हो जाता है।
२८. कबीर ने किसको आँगन में कुटिया बनाकर देनी की बात की है?
उत्तर : कबीर ने निंदक को आँगन में कुटिया बनाकर देने की बात की है।
२९. निंदक क्या निर्मल करता है?
उत्तर : निंदक मनुष्य का स्वभाव निर्मल करता है।
३०. कबीर के अनुसार कौन पंडित बनेगा?
उत्तर : कबीर के अनुसार प्रिय या भगवान के एक अक्षर को पढ़ने वाला पंडित बन जाता है।
३१. कबीर हाथ में क्या लेकर घर जलाने की बात करते हैं?
उत्तर : कबीर हाथ में मुराड़ा या मशाल लेकर घर जलाने की बात करते हैं।
३२. ‘घर जलाने’ का तात्पर्य क्या है?
उत्तर: घर जलान का तात्पर्य - घर का त्याग करने से है।
३३. कबीर घर जलाने या त्यागने की बात क्यों करते हैं?
उत्तर: कबीर घर जलाने/त्यागने की बात भगवान प्राप्ति/ ज्ञान प्राप्ति के लिए करते हैं।
३४. कबीर के हाथ में मुराड़ा लेकर घर जलाने की बात का तात्पर्य क्या है?
उत्तर : कबीर के हाथ में मुराड़ा लेकर घर जलाने का तात्पर्य - समाज में क्रांति या बदलाव लाने से हैं।
३५. कबीर को क्रांतदर्शी कवि क्यों कहा जाता है?
उत्तर : समाज की रुढ़ीवादी परंपरा को खत्म करके नई सोच लाने के विचारों के कारण कबीर को क्रांतदर्शी कवि कहते हैं।
2. दो तीन वाक्यों में उत्तर लिखें। (दो अंक के लिए पूछे जाने वाले प्रश्न)
१. कबीर मधुर भाषा का प्रयोग क्यों करने के लिए कह रहे हैं?
उत्तर - कबीर मधुर भाषा का प्रयोग करने के लिए कह रहे हैं क्योंकि मधुर भाषा से अहंकार की भावना को मिटाया जा सकता है। मधुर भाषा के कारण बोलने वाले और सुनने वाले के मन तथा शरीर को शांति प्राप्त हो सकती है। मीठी वाणी के माध्यम से आप लोगों को अपने वश में कर सकते हैं।
२. कण-कण में बसे राम को दुनिया के लोग क्यों नहीं देख पा रहे हैं?
उत्तर : कण- कण में भगवान या राम विद्यमान हैं फ़िर भी दुनिया के लोग नहीं देख पा रहे हैं क्योंकि वे मृग की तरह ही भगवान को अन्य जगहों पर ढूँढ़ रहे हैं। भगवान उनके अंदर तथा सर्वव्यापी है लेकिन मनुष्य को यह पता न होने से लोग अपने-अपने पूजास्थलों में खोजने की कोशिश कर रहे हैं। भगवान को दुनिया तभी देख पाएगी जब उन्हें ज्ञान की प्राप्ति होगी।
३. कबीर के अनुसार हरि या भगवान की प्राप्ति कब नहीं हो सकती?
उत्तर : कबीर के अनुसार हरि या भगवान की प्राप्ति तब तक नहीं हो सकती जब तक आपके अंदर मैं अर्थात अहंकार की भावना होती है। हरि को प्राप्त करने के लिए हमें अहंकार को त्यागना होगा। अहंकार मनुष्य को हर एक बात से दूर रखता है और मनुष्य में अहंकार अज्ञान के कारण निर्माण होता है। ज्ञान रुपी दीपक से अज्ञान रुपी अँधेरा और अहंकार की भावना समाप्त होते ही हरि की प्राप्ति हो सकती है।
४. कबीर ने संसार को सुखी और अपने आप को दुखी क्यों माना है?
उत्तर : कबीर संसार को सुखी मानते हैं क्योंकि उन्हें सिर्फ़ भौतिक सुख-सुविधाओं में ही आनंद मिलता है। संसार के लोगों का मन भगवान में अधिक न रमकर सुख- सुविधाओं वाले साधनों में है और इसी में उनका सुख है। परंतु कबीर अपने आपको दुखी मानते हैं क्योंकि उनका मन सुख-सुविधाओं से ज़्यादा भगवान में रमता है। भगवान का दर्शन न पाने से वे दुखी हैं। वे भगवान में ही अपना सुख ढूँढ़ते हैं।
५. राम के वियोग में मनुष्य या भक्त की हालत कैसी हो गई है?
उत्तर : साँप के डसने के बाद एक मनुष्य उस विष से तड़प-तड़पकर अपनी जान छोड़ देता है, ठीक उसी तरह राम के वियोग में मनुष्य या भक्त भी जान छो़ड़ देता है। राम के दर्शन न होने पर भक्त मर जाता है या फ़िर उनके वियोग में पागल जैसा व्यवहार करने लगता है। वह राम की प्राप्ति के बिना साधारण मनुष्य की तरह जीवन नहीं बिता सकता।
६. कबीर मनुष्य को निंदक पास रखने का सुझाव क्यों देते हैं?
उत्तर : कबीर निंदक को पास रखने का सुझाव देते हैं क्योंकि निंदक स्वभाव को निर्मल करता है। जैसे कपड़े पर लगी मैल को धोने का काम पानी और साबुन करता है ठीक उसी तरह मन की मैल को धोने का काम निंदक करता है। निंदक मनुष्य की गलतियों को दिखाता है और मनुष्य उन गलतियों को सुधारकर अपना स्वभाव निर्मल करता है। निंदक हरदिन आपकी गलतियों को बताएगा और आप उन गलतियों को सुधारकर अपना स्वभाव स्वच्छ और निर्मल कर सकेंगे।
७. कबीर के अनुसार पंडित कैसे बन सकते हैं?
उत्तर : कबीर ने पंडित बनने के लिए जो लोग पोथी या किताबें पढ़ते हैं, उसे मूर्खता माना है। उनका मानना है कि सिर्फ़ किताबें पढ़ने से कोई भी पंडित नहीं बन सकता। प्रियतम या भगवान के अक्षर को जाननेवाला ही पंडित बनता है। अर्थात जो भगवान को समझता है या उनको जानने का प्रयास करता है, वही पंडित बन सकता है।
८. कबीर दुनिया में क्रांति या बदलाव लाने के लिए क्या करते हैं?
उत्तर : कबीर दुनिया में बदलाव या क्रांति लाने के अपने घर को त्यागने की बातें करते हैं। उनका मानना है कि जब तक हम सांसारिक बंधनों में जकड़े रहेंगे तब तक हम कुछ नहीं कर सकते। हमें ज्ञान प्राप्ति, भगवान के दर्शन तथा समाज में सुधार करना है तो घर को छोड़ना पड़ेगा। मैंने अपना घर त्याग दिया है।और हाथ में क्रांति की मशाल ली है। मेरे साथ कोई चलना चाहता है तो उसे भी अपना घर त्यागना होगा तभी उसे ज्ञान तथा भगवान की प्राप्ति हो सकती है।
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