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कबीर की साखी Kabeer ki Sakhi Class 10 Hindi Course B: Competency-Based Summary, MCQs & Test Paper (2026 Board Exam)

                                                                कबीर की साखी

 

"नमस्ते दोस्तों!

कैसे हैं आप सब? क्या आपको भी लगता है कि 500 साल पुरानी ये साखियाँ आज के ज़माने में आउटडेटेड हो गई हैं? अगर ऐसा है, तो आप गलत हैं। कबीर दास जी अपने ज़माने के 'लाइफ कोच' थे। उन्होंने जो बातें तब कहीं, वो आज आपके स्कूल, दोस्ती और सोशल मीडिया के दौर में भी एकदम फिट बैठती हैं।

बोर्ड एग्ज़ाम 2026 के लिए जो 'Competency Based' सवाल आने वाले हैं, उनका तोड़ भी इसी पोस्ट में है। तो चलिए, कबीर साहब की मशाल लेकर ज्ञान की इस यात्रा पर निकलते हैं!

कबीर की साखी - भावार्थ और क्षमता आधारित निष्कर्ष

1. ऐसी बाणी बोलिए, मन का आपा खोइ... 

भावार्थ: कबीर कहते हैं कि हमें अपने अहंकार को त्यागकर ऐसी भाषा बोलनी चाहिए जो दूसरों को दुख न पहुँचाए। मीठा बोलने से सुनने वाले को तो सुख मिलता ही है, हमारा अपना मन भी शांत और शीतल रहता है। यह साखी सिखाती है कि शब्द एक दवा की तरह होते हैं जो बिना किसी खर्च के घाव भर सकते हैं।

निष्कर्ष (Competency Based): यह साखी आज प्रभावी संवाद की नींव है। यह सिखाती है कि सफलता के लिए बुद्धि के साथ-साथ व्यवहार में विनम्रता होना अनिवार्य है।


2. कस्तूरी कुंडलि बसै, मृग ढूँढै बन माँहि... 

भावार्थ: जैसे हिरण अपनी ही नाभि में छिपी कस्तूरी की खुशबू को पूरे जंगल में खोजता है, वैसे ही ईश्वर हर इंसान के हृदय में हैं, पर हम उन्हें मंदिरों और मस्जिदों में खोजते हैं। हम अपनी खुशियों की चाबी बाहर ढूंढ रहे हैं, जबकि वह हमारे भीतर है।

निष्कर्ष (Competency Based): यह साखी 'आत्म-जागरूकता' का पाठ पढ़ाती है। यह हमें बाहरी दिखावे और भीड़ के पीछे भागने के बजाय अपनी आंतरिक क्षमताओं को पहचानने के लिए प्रेरित करती है।


3. जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहिं... 

भावार्थ: कबीर का कहना है कि जब तक हृदय में 'मैं' यानी घमंड था, तब तक परमात्मा का अनुभव नहीं हुआ। जब ज्ञान का दीपक जला, तो अज्ञान का अँधेरा मिट गया और 'अहंकार' खत्म होते ही ईश्वर मिल गए।

निष्कर्ष (Competency Based): यह साखी स्पष्ट करती है कि 'सीखने की प्रक्रिया' तभी शुरू होती है जब आप अहंकार छोड़ते हैं। एक अहंकारी छात्र कभी नया ज्ञान ग्रहण नहीं कर सकता।

4. सुखिया सब संसार है, खायै अरु सोवै... 

भावार्थ: दुनिया के लोग खाने और सोने को ही जीवन का एकमात्र उद्देश्य मानकर खुश हैं। लेकिन जो व्यक्ति सजग है (कबीर), वह संसार की नश्वरता को देखकर दुखी है और जाग रहा है।

निष्कर्ष (Competency Based): यह साखी 'सामाजिक संवेदनशीलता' की बात करती है। यह हमें याद दिलाती है कि सिर्फ़ अपने सुख के बारे में सोचना पशु प्रवृत्ति है; समाज की समस्याओं के प्रति जागरूक रहना ही वास्तविक मनुष्यता है।

5. बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ... 

भावार्थ: परमात्मा के वियोग का दुख शरीर के अंदर सांप की तरह बस जाता है, जिस पर कोई दवा या मंत्र असर नहीं करता। जो ईश्वर का सच्चा प्रेमी है, वह उनके बिना जीवित नहीं रह सकता और अगर रहता भी है, तो संसार के लिए वह पागल समान हो जाता है।

निष्कर्ष (Competency Based): यह लक्ष्य के प्रति 'पूर्ण समर्पण' को दर्शाता है। जब आपका लक्ष्य आपकी आत्मा का हिस्सा बन जाता है, तभी आप असाधारण परिणाम हासिल करते हैं।

6. निंदक नेड़ा राखिये, आँगाणि कुटी बँधाइ... 

भावार्थ: कबीर कहते हैं कि अपनी बुराई करने वाले को हमेशा अपने पास रखें, क्योंकि वह बिना किसी साबुन और पानी के आपकी गलतियाँ बताकर आपके चरित्र को स्वच्छ और निर्मल बना देता है।

निष्कर्ष (Competency Based): यह 'फीडबैक' और आलोचना को सकारात्मक रूप से लेने की क्षमता विकसित करती है। विकास के लिए प्रशंशा से ज़्यादा आलोचना की ज़रूरत होती है।

7. पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुवा, पंडित भया न कोइ... 

भावार्थ: बड़ी-बड़ी किताबें पढ़कर लोग डिग्री तो पा लेते हैं, पर असली ज्ञानी नहीं बन पाते। सच्चा ज्ञानी वही है जिसने प्रेम और मानवता के 'ढाई अक्षर' पढ़ लिए हों।

निष्कर्ष (Competency Based): यह रटंत विद्या के खिलाफ एक करारा प्रहार है। यह हमें किताबी कीड़ा बनने के बजाय 'सहानुभूति' और मानवीय मूल्यों को अपनाने की शिक्षा देती है।


8. हम घर जाल्या आपणां, लिया मुराड़ा हाथि... 

भावार्थ: कबीर कहते हैं कि मैंने ज्ञान की मशाल से अपने मोह-माया का घर जला दिया है। अब मैं उसका घर जलाऊँगा (अज्ञान मिटाऊँगा), जो मेरे साथ इस सत्य के मार्ग पर चलने का साहस रखता है।

निष्कर्ष (Competency Based): यह साखी 'नेतृत्व' और 'जोखिम लेने' की क्षमता को दर्शाती है। बड़ा परिवर्तन लाने के लिए अपने कंफर्ट ज़ोन का त्याग करना पड़ता है।


Competency Based MCQs (Board Special 2026)

1. 'ऐसी बाणी बोलिए, मन का आपा खोइ'—यहाँ 'आपा' खोने का वास्तविक अर्थ आधुनिक संदर्भ में क्या हो सकता है? 
(क) अपनी सुध-बुध खो देना। 
(ख) अपने भीतर के अहंकार को समाप्त करना। 
(ग) गुस्से में आपे से बाहर हो जाना। 
(घ) दूसरों की बातों में आकर अपना व्यक्तित्व भूल जाना। 

उत्तर: (ख)

2. कस्तूरी मृग की स्थिति आज के उस छात्र जैसी है, जो: 
(क) दिन-रात केवल किताबों को रटने में लगा रहता है। 
(ख) अपनी छिपी हुई प्रतिभा को छोड़कर दूसरों के नोट्स और सफलता के पीछे भागता है।
 (ग) परीक्षा के डर से पढ़ाई छोड़ देता है। 
(घ) खेल-कूद में बहुत अच्छा है पर पढ़ाई में नहीं। 

उत्तर: (ख)

3. 'जब मैं था तब हरि नहीं'—इस साखी के अनुसार ईश्वर और अहंकार का संबंध कैसा है? 
(क) दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।
(ख) दोनों एक साथ रह सकते हैं। 
(ग) दोनों का संबंध प्रकाश और अंधकार जैसा है (एक आएगा तो दूसरा जाएगा)। 
(घ) दोनों का आपस में कोई संबंध नहीं है। 

उत्तर: (ग)

4. कबीर ने संसार को 'सुखिया' कहकर उन पर क्या कटाक्ष किया है?
(क) वे बहुत भाग्यशाली हैं कि उन्हें कोई चिंता नहीं है। 
(ख) वे भौतिक सुखों और अज्ञानता की नींद में सोए हुए हैं। 
(ग) वे बहुत अमीर और साधन संपन्न हैं। 
(घ) उन्हें ईश्वर की प्राप्ति हो चुकी है। 

उत्तर: (ख)

5. 'बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ'—यहाँ 'मंत्र' काम न करने का क्या कारण है?
(क) सांप बहुत ज़हरीला है। 
(ख) वियोग का दुःख आंतरिक है, जिसे बाहरी दवा या शब्दों से ठीक नहीं किया जा सकता। 
ग) मंत्र पढ़ने वाले को सही विधि नहीं पता। 
(घ) शरीर बहुत कमज़ोर हो चुका है। 

उत्तर: (ख)

6. निंदक को 'आँगाणि कुटी बँधाइ' रखने की सलाह कबीर ने क्यों दी है? 
(क) ताकि हम उससे बदला ले सकें। 
(ख) ताकि वह हमारी बुराई करना छोड़ दे। 
(ग) क्योंकि वह बिना किसी लागत के हमारे चरित्र की अशुद्धियों को दूर करता है। 
(घ) क्योंकि वह हमारा मनोरंजन करता है। 

उत्तर: (ग)

7. 'पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुवा'—यहाँ कबीर किस प्रकार की शिक्षा का विरोध कर रहे हैं?
(क) स्कूल और कॉलेजों की शिक्षा का। 
(ख) केवल पुस्तकीय ज्ञान और रटने की प्रवृत्ति का। 
(ग) धार्मिक ग्रंथों को पढ़ने का। 
(घ) अध्यापकों द्वारा दी जाने वाली शिक्षा का। 

उत्तर: (ख)

8. साखी के अनुसार 'पंडित' कहलाने की अनिवार्य शर्त क्या है?
(क) संस्कृत भाषा का गहरा ज्ञान होना। 
(ख) समाज में ऊँचा पद प्राप्त करना। 
(ग) दूसरों के प्रति प्रेम, करुणा और संवेदना का भाव रखना। 
(घ) हज़ारों पुस्तकें पढ़ लेना। 

उत्तर: (ग)

9. 'हम घर जाल्या आपणां'—यहाँ 'घर' किसका प्रतीक है? 
(क) ईंट और पत्थर से बना मकान। 
(ख) परिवार और रिश्तेदार। 
(ग) सांसारिक मोह-माया, लोभ और वासनाएँ। 
(घ) समाज की पुरानी परंपराएँ। 

उत्तर: (ग)

10. 'मुराड़ा' (जलती मशाल) लेकर चलने का गहरा अर्थ क्या है? 
(क) दूसरों के घरों में आग लगाना। 
(ख) ज्ञान के प्रकाश से अपनी और दूसरों की बुराइयों को नष्ट करना। 
(ग) अँधेरे रास्ते पर रोशनी करना। 
(घ) क्रोध में आकर विद्रोह करना। 

उत्तर: (ख)

11. कबीर की साखियों में 'साक्षी' शब्द का प्रयोग क्या सिद्ध करता है? 
(क) कि कबीर ने ये बातें सुनी-सुनाई कही हैं। 
(ख) कि ये कबीर के स्वयं के अनुभव और आँखों देखा सत्य है। 
(ग) कि वे समाज के डर से बोल रहे हैं। 
(घ) कि वे केवल कल्पना कर रहे हैं। 

उत्तर: (ख)

12. 'सीतल करे' से क्या तात्पर्य है? 
(क) शरीर का तापमान कम करना। 
(ख) मन को शांति और संतोष देना। 
(ग) वातावरण को ठंडा करना। 
(घ) चुपचाप बैठ जाना। 

उत्तर: (ख)

13. 'मृग ढूँढै बन माँहि'—यह पंक्ति मनुष्य की किस कमजोरी को दर्शाती है? 
(क) आलस्य को। 
(ख) बाहरी दिखावे और भटकाव को। 
(ग) डरपोक स्वभाव को। 
(घ) कमज़ोर याददाश्त को। 

उत्तर: (ख)

14. 'अंधियारा' मिटने के लिए कबीर ने किस शर्त को ज़रूरी माना है? 
(क) सूर्योदय होना। 
(ख) ज्ञान रूपी दीपक का दर्शन होना। 
(ग) आँखों का इलाज कराना। 
(घ) दीया जलाकर बैठना। 

उत्तर: (ख)

15. कबीर 'जागने' और 'रोने' की बात क्यों करते हैं? 
(क) क्योंकि उन्हें नींद नहीं आती। 
(ख) क्योंकि वे संसार की नश्वरता और लोगों की बेरुखी को देख रहे हैं। 
(ग) क्योंकि वे बीमार हैं। 
(घ) क्योंकि वे डरे हुए हैं।
 
उत्तर: (ख)

16. परमात्मा के प्रेमी को लोग 'पागल' क्यों समझने लगते हैं? 
(क) क्योंकि वह अजीब कपड़े पहनता है। 
(ख) क्योंकि वह दुनिया की मोह-माया को छोड़कर केवल प्रभु में लीन रहता है। 
(ग) क्योंकि वह किसी से बात नहीं करता। 
(घ) क्योंकि वह काम-धंधा छोड़ देता है। 

उत्तर: (ख)

17. 'बिन साबण पाणी बिना'—चरित्र की सफाई के लिए कबीर ने साबुन-पानी किसे माना है? 
(क) गंगा स्नान को।
(ख) निंदक की आलोचना को।
(ग) अच्छी पुस्तकों को। 
(घ) गुरु के उपदेश को। 

उत्तर: (ख)

18. 'ढाई आखर प्रेम का'—इस मुहावरे जैसी पंक्ति का संदेश क्या है? 
(क) अक्षर कम पढ़ना। 
(ख) किताबी ज्ञान से ऊपर मानवीय संवेदना को रखना। 
(ग) केवल प्रेम पत्र पढ़ना। 
(घ) पढ़ाई लिखाई छोड़ देना। 

उत्तर: (ख)

19. कबीर के अनुसार, सच्चा साथी वही है जो------ 
(क) हमारे साथ पार्टी करे। 
(ख) ज्ञान की मशाल थामकर बुराइयों को छोड़ने का साहस रखे। 
(ग) हमारी हर बात में हाँ मिलाए।
(घ) हमें पैसे उधार दे। 

उत्तर: (ख)

20. 'घट-घट राम' का विचार किस विचारधारा को पुष्ट करता है? 
(क) मूर्ति पूजा को। 
(ख) कण-कण में ईश्वर की व्याप्ति को। 
(ग) केवल मंदिर में ईश्वर होने को। 
(घ) ईश्वर के न होने को। 

उत्तर: (ख)

21. 'ऐसी बाणी बोलिए'—यह साखी समाज में किस समस्या का समाधान है? 
(क) गरीबी का। 
(ख) बढ़ती कड़वाहट और आपसी झगड़ों का। 
(ग) अशिक्षा का। 
(घ) बेरोजगारी का। 

उत्तर: (ख)

22. 'कस्तूरी मृग' किसका प्रतीक है? 
(क) जो रास्ता भूल गया है। 
(ख) उस इंसान का जो खुशियाँ बाहर ढूंढता है। 
(ग) एक जंगली जानवर का।

उत्तर: (ख)

23. 'पंडित भया न कोइ'—यहाँ 'पंडित' शब्द का उपयोग कबीर ने किसके लिए किया है? 
(क) एक विशेष जाति के लिए। 
(ख) वास्तविक ज्ञानी और समझदार व्यक्ति के लिए। 
(ग) जो पूजा-पाठ करता हो।
(घ) जो बहुत पढ़ा-लिखा न हो।

उत्तर: (ख)

24. 'मुराड़ा' शब्द कबीर की किस शैली को दर्शाता है? 
(क) शांत शैली। 
(ख) डरपोक शैली।
(ग) विलासी शैली। 
(घ) विद्रोही और क्रांतिकारी शैली।

उत्तर: (घ)

25. मृग की नाभि में कस्तूरी होना किसका उदाहरण है? 
(क) बाहरी खूबसूरती का। छिपी हुई शक्ति और सत्य का। 
(ख) बाहरी खूबसूरती का।
(ग) जानवरों की शारीरिक संरचना का। 
(घ) प्रकृति के चमत्कार का। 

उत्तर: (क)

26. कबीर के अनुसार, असली 'दुखिया' कौन है?
(क) जो गरीब है। 
(ख) जो सत्य को जानकर दुनिया के अज्ञान पर दुखी है। 
(ग) जो बीमार है। 
(घ) जिसके पास घर नहीं है। 

उत्तर: (ख)

27. 'आपा' खोने से व्यक्ति को क्या लाभ होता है? 
(क) वह कमज़ोर हो जाता है। 
(ख) वह समाज में लोकप्रिय और शांत हो जाता है। 
(ग) वह सब कुछ भूल जाता है। 
(घ) वह हार मान लेता है। 

उत्तर: (ख)

28. 'बिरह' की स्थिति में व्यक्ति को क्या महसूस होता है? 
(क) बहुत गुस्सा। 
(ख) ईश्वर से मिलने की तड़प और बेचैनी। 
(ग) बहुत ज़्यादा नींद। 
(घ) खुशी का अहसास। 

उत्तर: (ख)

29. कबीर की भाषा 'पंचमेल खिचड़ी' होने का क्या कारण है? 
(क) उन्हें भाषा का ज्ञान नहीं था। 
(ख) उन्होंने घूम-घूमकर विभिन्न क्षेत्रों के शब्दों को अपनाया। 
(ग) वे खाना बनाने के शौकीन थे। 
(घ) वे लोगों को भ्रमित करना चाहते थे। 

उत्तर: (ख)

30. इस पाठ का मुख्य उद्देश्य छात्रों को क्या सिखाना है?
(क) दोहे रटना। 
(ख) व्यावहारिक ज्ञान, विनम्रता और मानवीय संवेदनाओं को जीवन में उतारना। 
(ग) कबीर का जीवन परिचय याद करना। 
(घ) पुरानी भाषा सीखना। 

उत्तर: (ख)

'मास्टर' प्रश्न (2 मार्क्स के लिए - Competency Based)

1. मीठी वाणी बोलने से औरों को सुख और अपने तन को शीतलता कैसे प्राप्त होती है? 

उत्तर: जब हम अहंकार छोड़कर मीठा बोलते हैं, तो सामने वाले का गुस्सा शांत हो जाता है और उसे सम्मान महसूस होता है। साथ ही, मीठा बोलने से हमारे अपने मन में भी कड़वाहट खत्म होती है, जिससे हमें अंदरूनी शांति और सुकून  मिलता है।

2. मृग की भूल आज के इंसान की किस भूल से मिलती-जुलती है?

उत्तर: मृग अपनी खुशबू बाहर ढूंढता है, वैसे ही आज का इंसान शांति और भगवान को मंदिरों या बाहरी दुनिया में ढूंढ रहा है। कबीर सिखाते हैं कि जैसे खुशबू मृग के अंदर है, वैसे ही ईश्वर और असली खुशी हमारे अपने हृदय के अंदर है।

3. अहंकार और ईश्वर एक साथ क्यों नहीं रह सकते? 

उत्तर: अहंकार यानी 'मैं' और ईश्वर यानी 'प्रकाश'। जैसे रोशनी आने पर अँधेरा टिक नहीं सकता, वैसे ही जब तक मन में घमंड रहेगा, वहाँ ईश्वर की भक्ति या सच्चा ज्ञान प्रवेश नहीं कर पाएगा।

4. कबीर संसार को 'सुखिया' क्यों कह रहे हैं? क्या वे वास्तव में सुखी हैं? 

उत्तर: कबीर यहाँ व्यंग्य कर रहे हैं। वे उन लोगों को सुखिया कह रहे हैं जो केवल खाने-पीने और सोने को ही जीवन मानते हैं। असल में वे सुखी नहीं, बल्कि अज्ञानी हैं क्योंकि उन्हें जीवन के असली उद्देश्य का पता ही नहीं है।

5. बिरह का सांप डसने पर मंत्र काम क्यों नहीं करता?

उत्तर: जब किसी को परमात्मा से मिलने की तड़प (विरह) लग जाती है, तो उसे सांसारिक दवाइयाँ या सांत्वनाएँ ठीक नहीं कर सकतीं। यह दर्द आत्मा का होता है, जिसे केवल ईश्वर का मिलन ही शांत कर सकता है।

6. निंदक को आँगन में कुटिया बनाकर रखना क्यों फायदेमंद है? 

उत्तर: निंदक हमारी कमियाँ बताता है। अगर हम उसे पास रखेंगे, तो हमें अपनी गलतियों का पता चलता रहेगा और हम बिना किसी बाहरी साधन के अपने स्वभाव को बेहतर (साफ) बना पाएंगे।

7. डिग्रियां होने के बावजूद कोई व्यक्ति 'मूर्ख' कैसे हो सकता है?

उत्तर: कबीर के अनुसार, अगर किसी ने बड़ी-बड़ी किताबें पढ़ लीं पर उसके मन में प्रेम, दया और करुणा नहीं है, तो उसका सारा ज्ञान बेकार है। मानवता को न समझने वाला विद्वान कबीर की नज़र में ज्ञानी नहीं है।

8. कबीर ने अपना घर क्यों जलाया? क्या वे हमें भी ऐसा करने को कह रहे हैं?

उत्तर: यहाँ 'घर' का मतलब ईंट-पत्थर का मकान नहीं, बल्कि 'मोह-माया और वासना' का घर है। कबीर कह रहे हैं कि सच्चा ज्ञान पाने के लिए पुरानी बुरी आदतों को छोड़ना पड़ता है। वे हमें अज्ञान मिटाने की प्रेरणा दे रहे हैं।

9. कबीर की साखियों की भाषा को 'सधुक्कड़ी' क्यों कहा जाता है?

उत्तर: कबीर घुमक्कड़ साधु थे। वे जहाँ भी गए, वहाँ की स्थानीय भाषा (अवधी, राजस्थानी, पंजाबी) के शब्द अपनी बातों में मिला लिए। इसलिए उनकी भाषा को 'सधुक्कड़ी' या 'पंचमेल खिचड़ी' कहा जाता है, जो आम आदमी को आसानी से समझ आती है।

10. कबीर की भक्ति किस प्रकार की है—सगुण या निर्गुण? स्पष्ट करें। 

उत्तर: कबीर निर्गुण भक्ति के कवि हैं। वे किसी खास मूर्ति या रूप की पूजा नहीं करते, बल्कि उनका मानना है कि ईश्वर निराकार है और हर मनुष्य के अंदर मौजूद है।

11. साखी शब्द का मूल अर्थ क्या है और कबीर ने इसे ही क्यों चुना? 

उत्तर: 'साखी' शब्द 'साक्षी' से बना है, जिसका अर्थ है—गवाह या आँखों देखा। कबीर ने जो दुनिया में अपनी आँखों से अनुभव किया, वही साखियों में लिखा। यह कोरी कल्पना नहीं, बल्कि जीवन का सच है।

12. ईश्वर के वियोग में जीवित रहने वाले व्यक्ति की दशा कैसी हो जाती है? 

उत्तर: वह व्यक्ति दुनिया के मोह-जाल से कट जाता है। वह हर समय परमात्मा की याद में रहता है, जिससे लोग उसे 'बावरा' या पागल समझने लगते हैं।

13. आज के 'Selfie' और 'Show-off' के दौर में कस्तूरी मृग वाली साखी क्या सीख देती है? 

उत्तर: यह सिखाती है कि हम दूसरों को दिखाने में अपनी खुशी न ढूंढें। असली संतोष अपने आप को बेहतर बनाने और अपने अंदर झांकने से मिलता है।

14. निंदक और साबुन में क्या समानता है?

उत्तर: साबुन कपड़े की गंदगी साफ करता है, वैसे ही निंदक हमारी बातों और व्यवहार की गंदगी (बुराइयाँ) साफ करता है। अंतर बस यह है कि निंदक यह काम बिना किसी खर्चे के कर देता है।

15. प्रेम का ढाई अक्षर पढ़ने से कबीर का क्या तात्पर्य है? 

उत्तर: इसका तात्पर्य है—संवेदना और करुणा। हज़ारों किताबें पढ़ने से बेहतर है किसी के प्रति प्रेम और सहानुभूति का भाव रखना। यही सबसे बड़ा ज्ञान है।

16. कबीर के अनुसार 'अंधियारा' और 'दीपक' किन मानवीय प्रवृत्तियों के प्रतीक हैं?

उत्तर: अंधियारा अज्ञान और अहंकार का प्रतीक है, जबकि दीपक ज्ञान और विवेक का। जब मनुष्य के भीतर ज्ञान का उदय होता है, तो उसका घमंड अपने आप समाप्त हो जाता है।


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रहीम के दोहे भावार्थ- दोहा-१   रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।                टूटे से फ़िर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय॥ रहीम जी कहते हैं कि प्रेम का धागा हमें जल्दबाजी में नहीं तोड़ना चाहिए। अगर यह धागा एक बार टूटा तो दुबारा नहीं जुड़ सकता और जुड़ा भी तो वह पहले जैसे नहीं होगा बल्कि उसमें गाँठ पड़ी देखने मिलेगी। अर्थात रिश्ता एक धागे समान नाजुक और मुलायम होता है जो एक बार टुट गया तो पहले जैसा उसमें विश्वास नहीं रहेगा इसलिए हमें रिश्ते को किसी भी बात को लेकर तोड़ने नहीं देना है। जिससे हमें बाद में पछताना पड़े।   दोहा-२ रहिमन निज मन की बिथा, मन ही राखो गोय।               सुनि अठिलैहैं लोग सब, बाँटि न लैहैं कोय॥ रहीम जी कहते हैं कि हमें अपनी मन की पीड़ा को मन में ही छुपाकर रखना है। लेकिन हम अपनी मन की पीड़ा को दुसरों के सामने सहानुभूति प्राप्त करने के लिए व्यक्त करते हैं तो लोग उसे सुनकर हमारी मदद करने की बजाय हमारा मज़ाक उड़ा सकते हैं। कोई भी हमारी पीड़ा को ना लेगा ना ही दूर करेगा। इसलिए हमारी पिड़ा ...

Smriti Sanchayan Class 9 NCERT Q/A (स्मृति.. संचयन प्रश्नोंत्तर )

 स्मृति                                श्रीराम शर्मा बोध-प्रश्न १. भाई के बुलाने पर घर लौटते समय लेखक के मन में किस बात का डर था? उत्तर- भाई के बुलाने पर घर लौटते समय लेखक के मन में ड़र था क्योंकि उसके मन में बड़े भाई साहब के प्रति ड़र की भावना बनी रहती थी। जब गाँव का एक व्यक्ति उसको भाई द्वारा घर जल्दी बुलाने की बात करता है, उस वक्त वह सोच रहा था कि उसने ऐसा कौन-सा अपराध किया था कि उसको बड़े भाई ने जल्दी आने के लिए कहा। छोटे भाई को सर्दी के दिनों में घर से बाहर लेकर गया इसलिए शायद गुस्से में आकर डाँटने के लिए बुलाया होगा।   २. मक्खनपुर पढ़ने जाने वाली बच्चों की टोली रास्ते में पड़ने वाले कुएँ में ढ़ेला क्यों फ़ेंकती थी? उत्तर-  मक्खनपुर पढ़ने जाने वाली बच्चों की टोली रास्ते में पड़ने वाले कुएँ में ढेला फ़ेंकती थी क्योंकि उस कुएँ में साँप गिर पड़ा था, बच्चों को उस साँप पर ढेला फ़ेंककर उसकी फ़ुसकार सुनने की इच्छा होती थी। बच्चों को ढ़ेला फ़ेंककर साँप की फ़ुसकार सुनना बड़ा काम करने के बराबर लगता था। स्कूल आते-जात...