Skip to main content

Todti Patthar PUC-1st year Sahitya vaibhav Karnataka state Board Summary/ Question Answers (तोड़ती पत्थर सरल भावार्थ )

                                                              तोड़ती पत्थर

                                                                            सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'

जन्म और प्रारंभिक जीवन: 

निराला जी का जन्म सन् १८९६ ई. में बंगाल के महिषादल राज्य (मेदिनीपुर) में हुआ था। उनका बचपन सुखद नहीं रहा; अल्पायु में ही माता का साया सिर से उठ गया और बाद में पत्नी व पिता के असामयिक निधन ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। गरीबी, सामाजिक तिरस्कार और अपनों के बिछड़ने के गम से जूझते हुए निराला का व्यक्तित्व अत्यंत जुझारू और संघर्षशील बन गया। उनकी मृत्यु सन् १९६१ ई. में हुई।

साहित्यिक कृतियाँ: 

निराला जी की लेखनी बहुमुखी थी। उनकी प्रमुख काव्य रचनाएँ निम्नलिखित हैं:

  • 'परिमल' और 'गीतिका'

  • 'अनामिका' और 'अर्चुना'

  • 'आराधना' और 'कुकुरमुत्ता'

  • 'राम की शक्तिपूजा' और 'तुलसीदास'

साहित्यिक विशेषताएँ और भाषा-शैली: 

निराला के काव्य में विषय और शिल्प दोनों ही दृष्टियों से नवीनता और विविधता देखने को मिलती है. उनकी रचनाओं में मानवतावाद, भक्ति, श्रृंगार और प्रकृति के प्रति प्रेम का गहरा चित्रण है. उनकी भाषा में एक अजीब सी 'ओज' (तेज), प्रवाह और गंभीरता है। वे अपनी बात को बड़ी कसक और गरिमा के साथ कहने के लिए जाने जाते हैं.

प्रस्तुत कविता का सार (वह तोड़ती पत्थर):   संकलित कविता 'वह तोड़ती पत्थर' उनके काव्य-संग्रह 'अनामिका' से ली गई है। यह एक प्रगतिवादी रचना है जिसमें कवि ने चिलचिलाती धूप में सड़क पर पत्थर तोड़ने वाली एक असहाय नारी का सजीव चित्रण किया है। एक ओर अमीरों की ऊँची अट्टालिकाएँ हैं और दूसरी ओर भीषण गर्मी में पसीना बहाती यह युवती, जो समाज की आर्थिक विषमता (अमीर-गरीब की खाई) की ओर हमारा ध्यान खींचती है।


कवि मौसम की भयावहता और सामाजिक भेदभाव को दर्शाते हैं। दोपहर का समय है और सूरज की तपिश अपने चरम पर है। गर्म हवाएँ (लू) चल रही हैं और जमीन रुई की तरह जल रही है, जिससे चारों ओर धूल और गर्मी की चिंगारियां छाई हुई हैं। इसी तपती दोपहर में वह स्त्री पत्थर तोड़ रही है। विडंबना यह है कि जहाँ वह मेहनत कर रही है, उसके ठीक सामने अमीरों के ऊंचे महल, घनी छाया वाले पेड़ और सुंदर बगीचे (अट्टालिका, प्राकार) हैं। यह दृश्य गरीब और अमीर के बीच की गहरी खाई को स्पष्ट करता है।

कवि और उस महिला के बीच के एक मूक संवाद को दिखाया गया है। जब वह महिला देखती है कि कोई उसे देख रहा है, तो वह एक बार उन आलीशान मकानों की ओर देखती है और फिर कवि की ओर। कवि को उसकी दृष्टि में एक ऐसी चोट (पीड़ा) दिखाई देती है जो कभी रोई नहीं, यानी उसने अपने दुखों को स्वाभिमान के साथ स्वीकार कर लिया है। एक पल के ठहराव के बाद, उसके माथे से पसीने की बूंदें गिरती हैं और वह फिर से अपने काम में लीन हो जाती है। उसके काम में वापस लौटने का अंदाज ऐसा है मानो वह गर्व से कह रही हो— "मैं पत्थर तोड़ती हूँ"।

सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' जी की प्रसिद्ध कविता 'वह तोड़ती पत्थर' पर आधारित प्रश्नों के उत्तर यहाँ अत्यंत सरल और शुद्ध भाषा में दिए गए हैं। इन उत्तरों को इस तरह लिखा गया है जिससे आपको परीक्षा में पूरे अंक प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

I. एक शब्द या वाक्यांश या वाक्य में उत्तर लिखिए:

१. नारी कहाँ पत्थर तोड़ती थी?

उत्तर: वह नारी इलाहाबाद के पथ (सड़क) पर पत्थर तोड़ती थी।

२. पत्थर तोड़ती नारी के तन का रंग कैसा था?

उत्तर: पत्थर तोड़ती हुई उस नारी के तन का रंग सांवला (श्याम तन) था।

३. नारी बार-बार क्या करती थी?

उत्तर: वह नारी बार-बार अपने हाथों में थामे गुरु हथौड़े से पत्थरों पर प्रहार करती थी।

४. नारी कब पत्थर तोड़ रही थी?

उत्तर: नारी दोपहर की चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी में पत्थर तोड़ रही थी।

५. नारी के माथे से क्या टपक रहा था?

उत्तर: कठिन परिश्रम के कारण नारी के माथे से पसीने की बूंदें (सीकर) टपक रही थीं।

६. 'तोड़ती पत्थर' कविता के कवि कौन हैं?

उत्तर: इस कविता के कवि हिंदी साहित्य के महाप्राण सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' हैं।

II. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए:

१. इलाहाबाद के पथ पर पत्थर तोड़ने वाली स्त्री का चित्रण कीजिए। 

उत्तर: कवि निराला ने इलाहाबाद की सड़क पर पत्थर तोड़ती एक मजदूरनी का बहुत ही मार्मिक चित्रण किया है। वह स्त्री सांवली है, लेकिन उसका शरीर यौवन की शक्ति से भरा हुआ है। वह किसी छायादार पेड़ के नीचे नहीं, बल्कि चिलचिलाती धूप में बैठी है। अपनी आँखें नीची किए वह पूरी तन्मयता के साथ बड़े हथौड़े से पत्थरों को तोड़ने में जुटी है। उसके इस रूप में एक ओर गरीबी का संघर्ष है, तो दूसरी ओर काम के प्रति सच्ची लगन और गरिमा झलकती है।

२. किन परिस्थितियों में नारी पत्थर तोड़ रही थी? 

उत्तर: उस समय मौसम की परिस्थितियाँ अत्यंत कठिन और कष्टदायक थीं। गर्मियों के दिन थे और सूरज दोपहर में आग उगल रहा था। चिलचिलाती धूप के साथ झुलसा देने वाली 'लू' चल रही थी और चारों ओर धूल की गर्म चिंगारियाँ उड़ रही थीं। जमीन रुई की तरह जल रही थी। ऐसी विपरीत परिस्थितियों में भी वह नारी बिना किसी सहारे या छाया के सड़क किनारे अपना श्रम जारी रखे हुए थी।

३. 'तोड़ती पत्थर' कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखिए। 

उत्तर: यह कविता समाज की आर्थिक विषमता और एक श्रमिक के स्वाभिमान को दर्शाती है। इलाहाबाद की सड़क पर एक अकेली महिला भीषण गर्मी और लू के बीच पत्थर तोड़ रही है। उसके सामने अमीरों की ऊंची-ऊंची कोठियाँ और घने पेड़ हैं, लेकिन उसे काम करने के लिए छाया तक नसीब नहीं है। जब वह देखती है कि कवि उसे देख रहे हैं, तो वह एक बार उन महलों की ओर देखती है और फिर अपने काम की ओर उसकी आँखों में कोई शिकायत नहीं, बल्कि एक मौन स्वीकृति है। अंत में, वह अपने पसीने को पोंछकर फिर से काम में जुट जाती है, जो यह संदेश देता है कि संघर्ष ही उसका जीवन है।

III. ससंदर्भ भाव स्पष्ट कीजिए:

१. चढ़ रही थी धूप... उठी झुलसाती हुई लू |

संदर्भ: ये पंक्तियाँ महाप्राण सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा रचित कविता 'वह तोड़ती पत्थर' से ली गई हैं।

भावार्थ: इन पंक्तियों में कवि ने गर्मियों की भयानक दोपहर का वर्णन किया है। कवि कहते हैं कि सूरज की तपिश बढ़ती जा रही थी और झुलसा देने वाली गर्म हवाएँ (लू) चल रही थीं। पूरी धरती आग की तरह जल रही थी और हवा में धूल की गर्म चिंगारियां उड़ रही थीं| ऐसी असहनीय गर्मी में भी वह मजदूरनी अपना काम करना नहीं छोड़ती, जो उसके साहस और मजबूरी दोनों को दर्शाता है।

२. देखते देखा मुझे तो एक बार... जो मार खा रोई नहीं।

संदर्भ: ये पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक की कविता 'वह तोड़ती पत्थर' से ली गई हैं, जिसके रचयिता निराला जी हैं।

भावार्थ: जब उस मजदूरनी ने देखा कि कवि उसे सहानुभूति से देख रहे हैं, तो उसने एक बार उन आलीशान मकानों की ओर देखा और फिर अपनी स्थिति की ओर उसकी दृष्टि में एक ऐसी गहरी पीड़ा थी जिसने जीवन में बहुत दुःख (मार) झेले थे, लेकिन वह कभी कमजोर पड़कर रोई नहीं| उसने अपने संघर्ष और गरीबी को एक स्वाभिमानी योद्धा की तरह स्वीकार कर लिया है और बिना किसी शिकायत के वह फिर से पत्थर तोड़ने में लग जाती है|



Popular Posts

KAR CHALE HUM FIDA NCERT Course B Class-10 Solutions & Summary .. (कर चले हम फ़िदा भावार्थ/Question answers ... FULL MARKS)

  कर चले हम फ़िदा                                           कैफ़ी आज़मी कवि परिचय -                          * कैफ़ी आज़मी का वास्तविक नाम अतहर हुसैन रिज़वी है।                         * जन्म- १९ जनवरी १९१९ उत्तरप्रदेश के आज़मगढ़ जिले मजमां गाँव में हुआ।                         * इनका पूरा परिवार कला क्षेत्र से जुड़ा था। भावार्थ : प्रस्तुत पंक्तियों में एक बलिदानी सैनिक के अंतिम संदेश का चित्रण है। सैनिक देशवासियों को संबोधित करते हुए कहता है कि हमने अपने प्राण और अपना यह नश्वर शरीर राष्ट्र की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया है। अब हमारे जीवन की यात्रा समाप्त हो रही है, अतः हम इस मातृभूमि की सुरक्षा का पावन दायित्व आप देशवासियों को सौंप रहे हैं। सैनिक उन कठिन परिस्थितियों का स्मर...

Suchana Lekhan NCERT Class-10 (सूचना लेखन कक्षा - १० )

 सूचना लेखन * ‘सूचना लेखन’ पाठ का कक्षा १० वीं के हिंदी कोर्स -ब के पाठ्यक्रम में समावेश किया गया है।  * सूचना लेखन करते समय पूरे अंक लेने के लिए निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना आवश्यक है- १. सूचना लेखन करते समय सबसे पहले चौकोन आकार का बॉक्स बनाएँ। २. सबसे उपर बॉक्स के मध्य में सूचना का शीर्षक लिखें। ३. सूचना जिस संस्था द्वारा दी जा रही है, उसका पहले उपर नाम लिखें। जैसे-  विद्यालय, सोसाइटी, संस्था आदि। ४. उसकी नीचली पंक्ति के मध्य में ‘सूचना’ लिखें। ५. सूचना लिखने के बाद दाईने बाजू में दिनांक लिखें। दिनांक लिखते समय महीना हिन्दी में लिखें। सूचना लिखने की दिनांक और कार्यक्रम की दिनांक में कम से कम एक सप्ताह का अंतर रखें। कोई घटना पहले घटी है, तो  सूचना लिखने की दिनांक से पहले एक सप्ताह की दिनांक विषयवस्तु में लिखें।  ६.  सूचना लेखन की विषयवस्तु लिखते समय दिवस, दिनांक, समय, स्थल और विषय का उल्लेख करना आवश्यक है। सूचना की विषयवस्तु दो अनुच्छेदों में लिखें। विषय को बड़े अक्षरों में लिखें। ७. विषयवस्तु के बाद अंत में आपका पद और नाम लिखिए।  ८. सूचना के दो प्रा...

समास (Samas सरल, Tricky & Important Notes)

                                                                                                समास समास शब्द का अर्थ- ‘संक्षिप्त रुप’ मतलब दो से अधिक शब्दों को मिलाकर छोटा शब्द रुप तैयार करना। दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से नया शब्द बनता है, उसे समास कहते हैं। उदा. पाठ के लिए शाला = पाठशाला, चार राहों का समूह - ‘चौराहा’          उपर्युक्त उदाहरण में दो पद (शब्द)हैं। ये पूर्व पद (पहला शब्द) और उत्तरपद (दूसरा शब्द) कहलाते हैं। इन दो पदों को मिलाकर समस्त पद(पूरा शब्द) बनता है। जैसे- रसोई + घर = रसोईघर                        चौ(चार) + राहा (राह)  = चौराहा         पूर्व पद  + उत्तर पद  =...

रहीम के दोहे - NCERT Class 9 वीं Solutions ( Raheem ke Dohe .... Bhavath Question & Answers)

रहीम के दोहे भावार्थ- दोहा-१   रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।                टूटे से फ़िर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय॥ रहीम जी कहते हैं कि प्रेम का धागा हमें जल्दबाजी में नहीं तोड़ना चाहिए। अगर यह धागा एक बार टूटा तो दुबारा नहीं जुड़ सकता और जुड़ा भी तो वह पहले जैसे नहीं होगा बल्कि उसमें गाँठ पड़ी देखने मिलेगी। अर्थात रिश्ता एक धागे समान नाजुक और मुलायम होता है जो एक बार टुट गया तो पहले जैसा उसमें विश्वास नहीं रहेगा इसलिए हमें रिश्ते को किसी भी बात को लेकर तोड़ने नहीं देना है। जिससे हमें बाद में पछताना पड़े।   दोहा-२ रहिमन निज मन की बिथा, मन ही राखो गोय।               सुनि अठिलैहैं लोग सब, बाँटि न लैहैं कोय॥ रहीम जी कहते हैं कि हमें अपनी मन की पीड़ा को मन में ही छुपाकर रखना है। लेकिन हम अपनी मन की पीड़ा को दुसरों के सामने सहानुभूति प्राप्त करने के लिए व्यक्त करते हैं तो लोग उसे सुनकर हमारी मदद करने की बजाय हमारा मज़ाक उड़ा सकते हैं। कोई भी हमारी पीड़ा को ना लेगा ना ही दूर करेगा। इसलिए हमारी पिड़ा ...

Smriti Sanchayan Class 9 NCERT Q/A (स्मृति.. संचयन प्रश्नोंत्तर )

 स्मृति                                श्रीराम शर्मा बोध-प्रश्न १. भाई के बुलाने पर घर लौटते समय लेखक के मन में किस बात का डर था? उत्तर- भाई के बुलाने पर घर लौटते समय लेखक के मन में ड़र था क्योंकि उसके मन में बड़े भाई साहब के प्रति ड़र की भावना बनी रहती थी। जब गाँव का एक व्यक्ति उसको भाई द्वारा घर जल्दी बुलाने की बात करता है, उस वक्त वह सोच रहा था कि उसने ऐसा कौन-सा अपराध किया था कि उसको बड़े भाई ने जल्दी आने के लिए कहा। छोटे भाई को सर्दी के दिनों में घर से बाहर लेकर गया इसलिए शायद गुस्से में आकर डाँटने के लिए बुलाया होगा।   २. मक्खनपुर पढ़ने जाने वाली बच्चों की टोली रास्ते में पड़ने वाले कुएँ में ढ़ेला क्यों फ़ेंकती थी? उत्तर-  मक्खनपुर पढ़ने जाने वाली बच्चों की टोली रास्ते में पड़ने वाले कुएँ में ढेला फ़ेंकती थी क्योंकि उस कुएँ में साँप गिर पड़ा था, बच्चों को उस साँप पर ढेला फ़ेंककर उसकी फ़ुसकार सुनने की इच्छा होती थी। बच्चों को ढ़ेला फ़ेंककर साँप की फ़ुसकार सुनना बड़ा काम करने के बराबर लगता था। स्कूल आते-जात...