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Gahane PUC 2nd year (Sahitya Gaurav) Karnataka Board/Summary/Question & Answer (गहने ...सारांश व प्रश्नोंत्तर)

                                                                             गहने 

                                                                                कवि : कुवेंपु

                                                                                अनुवादक : डॉ. एम.विमला

कविता : 

सोने के गहने क्योंकर, माँ? 

तकलीफ देते हैं, नहीं चाहिए, माँ! 

रंगीन कपड़े क्योंकर, माँ? 

मिट्टी में खेलने नहीं देते, माँ!

भावार्थ :

इस कविता में एक छोटी बच्ची अपनी माँ से बात कर रही है। बच्ची कहती है कि माँ, मुझे ये सोने के गहने क्यों पहनाती हो? ये भारी और बंधन बन जाते हैं, इनसे शरीर को कष्ट होता है। मुझे इनकी ज़रूरत नहीं है। इन्हें पहनकर मैं मिट्टी में आज़ादी से खेल नहीं पाती। कपड़े गंदे होने के डर से मेरी खेलकूद की आज़ादी छिन जाती है।

ताकि दिखाई दोसुंदर, बहुत ही सुंदर- यों कहती हो 

सुंदर लगे किसको, कहो माँ? 

देखनेवालों को लगता है सुंदर, देता है आनंद;

मगर मुझे बनता है बड़ा बंधन!

भावार्थ : 

बच्ची माँ से सवाल करती है कि तुम कहती हो कि ये गहने और कपड़े मुझे 'सुंदर' दिखाने के लिए हैं। पर माँ, ये सुंदरता किसके लिए है? दूसरों को शायद मुझे सजा-धजा देखकर अच्छा लगता होगा या उन्हें आनंद मिलता होगा, लेकिन मेरे लिए तो ये गहने और दिखावटी कपड़े एक 'बंधन' (रुकावट) की तरह हैं। ये मेरी स्वछंदता को  रोक देते हैं।

मेरा यह बचपन, तुम्हारा मातृत्व

ये ही गहने हैं मेरे लिए, माँ; 

मैं तुम्हारा गहना, तुम मेरा गहना;

फिर अन्य गहने क्यों चाहिए, माँ?

भावार्थ : 

अंत में बच्ची बहुत ही भावुक और सुंदर बात कहती है। वह कहती है कि माँ, मेरा यह भोला 'बचपन' और तुम्हारी मुझ पर उमड़ने वाला मातृत्व (माँ का प्यार) ही असली गहने हैं। मेरे लिए सबसे बड़ा आभूषण तुम हो और तुम्हारे लिए सबसे कीमती गहना मैं हूँ। जब हमारे पास एक-दूसरे का इतना पवित्र प्रेम है, तो माँ! हमें इन निर्जीव सोने के गहनों की क्या ज़रूरत है?


प्रश्नोंत्तर :

I. एक शब्द या वाक्यांश या वाक्य में उत्तर लिखिए:

1. बेटी सोने के गहने क्यों नहीं चाहती? 

उत्तर: बेटी सोने के गहने इसलिए नहीं चाहती क्योंकि वे शरीर को तकलीफ देते हैं।

2. बेटी रंगीन कपड़े पहनने से क्यों इनकार करती है? 

उत्तर: वह रंगीन कपड़े पहनने से मना करती है क्योंकि वे उसे मिट्टी में खेलने से रोकते हैं।

3. माँ रंगीन कपड़े और गहने पहनने के लिए क्यों आग्रह करती है? 

उत्तर: माँ चाहती है कि उसकी बेटी बहुत ही सुंदर दिखाई दे।

4. बेटी को क्यों सुंदर दिखना है? 

उत्तर: बेटी का मानना है कि सुंदरता दूसरों को खुशी देने के लिए होती है, लेकिन उसके लिए यह केवल एक बंधन है।

5. बेटी सजने-धजने से क्या महसूस करती है? 

उत्तर: बेटी सजने-धजने को एक बड़ी रुकावट या बंधन महसूस करती है।

6. बेटी किन्हें गहने मानती है? 

उत्तर: बेटी अपने बचपन और माँ के मातृत्व (ममता) को ही असली गहने मानती है।

7. माँ और बेटी एक-दूसरे के लिए क्या बनते हैं? 

उत्तर: माँ और बेटी एक-दूसरे के लिए प्रेम रूपी अनमोल गहने बनते हैं।


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II. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए:

1. बेटी रंगीन कपड़े और गहने क्यों नहीं चाहती? 

उत्तर: बेटी को दिखावे की वस्तुओं में रुचि नहीं है। उसे लगता है कि सोने के गहने असुविधाजनक होते हैं और शरीर को कष्ट पहुँचाते हैं। साथ ही, भारी और रंगीन कपड़े पहनने से वह धूल-मिट्टी में अपनी मर्जी से खेल नहीं पाती। वह अपनी आज़ादी को गहनों से ज़्यादा कीमती मानती है।

2. 'गहने' कविता के द्वारा कवि ने क्या आशय व्यक्त किया है? 

उत्तर: इस कविता के माध्यम से कवि यह समझाना चाहते हैं कि सच्ची सुंदरता बाहरी सजावट या सोने-चांदी में नहीं, बल्कि आपसी प्रेम और रिश्तों में होती है। एक बच्चे के लिए उसका बेपरवाह बचपन और माँ की ममता दुनिया के सबसे बड़े आभूषण हैं। कवि ने कृत्रिम दिखावे की तुलना में प्राकृतिक सादगी को श्रेष्ठ बताया है।


III. ससंदर्भ भाव स्पष्ट कीजिए:

ताकि दिखाई दो सुंदर, बहुत ही सुंदर-यों कहती हो 

सुंदर लगे किसको, कहो माँ? 

देखने वालों को लगता है सुंदर, देता है आनंद; 

मगर मुझे बनता है बड़ा बंधन!

संदर्भ: ये पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक की कविता 'गहने' से ली गई हैं। इसके रचयिता प्रसिद्ध कवि कुवेंपु जी हैं और अनुवादक डॉ.एम.विमला जी हैं।

भावार्थ: उपर्युक्त दी गई पंक्तियों में बेटी अपनी माँ के तर्क का उत्तर दे रही है। जब माँ कहती हैं कि गहने पहनने से वह सुंदर दिखेगी, तो बेटी पूछती है कि यह सुंदरता किसके काम की है? वह कहती है कि बाहरी सजावट शायद देखने वालों की आँखों को सुख देती होगी, लेकिन उसे खुद को इन चीज़ों में कैद महसूस होता है। उसके लिए ये सुंदर वस्तुएं खुशी के बजाय एक बंधन बन जाती हैं जो उसकी सहजता को छीन लेती हैं।


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‘कायर मत बन’ कविता का सारांश और सरल भाषा में लिखे हुए सटिक प्रश्नों के उत्तर पढ़ने के लिए नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करें :




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