Bharat ki Dharati PUC 2nd year Sahitya Vaibhav Karnataka state board/ Summary/ Question & Answer ( भारत की धरती सरल भावार्थ )
भारत की धरती
डॉ. पुण्यमचन्द 'मानव'
जन्म :
डॉ. 'मानव' का जन्म २४ फरवरी १९३२ को हरियाणा के भिवानी जिले में हुआ था।
कार्यक्षेत्र और उपलब्धियाँ:
उन्होंने १९५४ से १९६४ तक भिवानी के वैश्य हायर सेकेंडरी स्कूल में सेवाएँ दीं।
इसके बाद, वे १९६४ से १९८९ तक बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल में हिंदी प्राध्यापक के पद पर कार्यरत रहे।
साहित्य के प्रति उनके योगदान के लिए उन्हें कर्नाटक सरकार (१९७२) और हरियाणा साहित्य अकादमी (२०११) द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।
प्रमुख कृतियाँ:
'वैदिक पथ प्रदर्शक'
'मधुशाला'
'यज्ञपूजा'
'जीवन गीत' और 'काव्यांजलि'
साहित्यिक विशेषताएँ:
डॉ. 'मानव' की कविताओं में राष्ट्रीय विचारों का प्रधानता है। उनकी कविता 'भारत की धरती', जो 'काव्यांजलि' से ली गई है, भारत के गौरवशाली इतिहास और उसकी सांस्कृतिक एकता का सुंदर संगम है। उन्होंने विशेष रूप से कर्नाटक के प्रति अपनी गौरवपूर्ण भावनाओं को भी अपनी रचनाओं में पिरोया है।हिंदी साहित्य जगत में डॉ. पुण्यमचन्द 'मानव' एक ऐसे रचनाकार के रूप में जाने जाते हैं, जिनकी कविताओं में राष्ट्रभक्ति और समाज के प्रति अटूट निष्ठा साफ झलकती है। उनका मानना है कि बिना संघर्ष और साहस के जीवन में सफलता की प्राप्ति संभव नहीं है।
कविता का सारांश :
डॉ. पुण्यमचन्द 'मानव' जी द्वारा रचित कविता 'भारत की धरती' का सारांश यहाँ बहुत ही सरल और प्रभावशाली ढंग से दिया गया है।
१. भारत माता की धरती, वीरों, संतों की धरती है।
राम-कृष्ण की जन्मभूमि, मन में मुद-मंगल भरती है।
उत्तर में उत्तर प्रदेश-----------------------------।
-------------------------------संतों की धरती है।
कवि डॉ. मानव कहते हैं कि भारत की यह पावन भूमि वीरों, ऋषियों और संतों की धरती है। यह वह पवित्र स्थान है जहाँ भगवान राम और कृष्ण ने जन्म लेकर मानवीय आदर्शों की स्थापना की। उत्तर भारत के काशी, प्रयाग और हरिद्वार जैसे तीर्थ स्थल इसी धरती की शोभा बढ़ाते हैं। इतना ही नहीं, मलिक मोहम्मद जायसी, कबीर और तुलसीदास जैसे महान साहित्यकारों की वाणी ने इसी मिट्टी से जन्म लेकर समाज को ज्ञान का मार्ग दिखाया है। कवि के अनुसार, यह भूमि जहाँ एक ओर प्रेम और भक्ति की मिसाल है, वहीं दूसरी ओर रावण और कंस जैसे अत्याचारियों का दमन करने वाली शक्ति भी इसी धरती ने दिखाई है।
२. मस्तक ऊँचा किए हिमालय, ---------------।
----------------------------- संतों की धरती है।
कविता के अगले भाग में भारत की शक्ति और भूगोल का वर्णन है। भारत का मस्तक हिमालय के समान ऊँचा है, जो इसकी अडिगता का प्रतीक है। पंजाब की धरती लाला लाजपत राय (पंजाब केसरी) जैसे वीरों के बलिदान की गवाह है। युद्ध के मैदान में गुरु तेग बहादुर जी का साहस और गुरु नानक देव जी की वाणी की धीरता इसी मिट्टी की देन है। कवि कहते हैं कि जब भारत के वीर हुंकार भरते हैं, तो पूरी दुनिया की गर्जना भी इनके सामने फीकी पड़ जाती है। यह भूमि वीरता और आध्यात्मिकता का एक अनूठा संगम है।
३. वेद और उपनिषद ज्ञान गीता---------।
--------------------------संतों की धरती है।
कवि भारत को ज्ञान का केंद्र बताते हैं। वे कहते हैं कि वेद, उपनिषद और गीता का शाश्वत ज्ञान इसी धरती से निकला है, जिसने पूरी मानवता को तत्वज्ञान दिया है। सरस्वती नदी के तटों पर गूँजे वैदिक मंत्र आज भी हमारी संस्कृति का आधार हैं। हरियाणा की भूमि अर्जुन, भीम और युधिष्ठिर जैसे धर्म-योद्धाओं की कर्मस्थली रही है। राजस्थान की रेत में आज भी वीरों की हुंकार सुनाई देती है। अंत में कवि स्पष्ट करते हैं कि भारत केवल एक जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि धर्म, कर्म, संस्कृति और सभ्यता का वह पुंज है, जिसके सामने स्वर्ग की इंद्रपुरी भी नतमस्तक हो जाती है।
४. राजस्थान चलो तो सुन लो, राणा-------------।
----------------------------- संतों की धरती है।
कवि राजस्थान की शौर्य गाथा का वर्णन करते हुए कहते हैं कि इस मरुभूमि की रग-रग में राणा प्रताप की वीरता रची-बसी है। यहाँ की हल्दीघाटी की मिट्टी आज भी उन तलवारों की खनक और योद्धाओं के स्वाभिमान की गवाह है, जो कभी झुके नहीं। यह वह भूमि है जहाँ 'सेनाणी' जैसी वीर स्त्रियाँ और 'जौहर' की अमर कहानियाँ आज भी भारतीय संस्कृति के मस्तक को ऊँचा करती हैं। राजस्थान की हुंकार आज भी वीरों के मन में जोश भर देती है।
५. यह बिहार की भूमि, -------------------।
---------------------- संतों की धरती है।
बिहार की धरती का महत्व बताते हुए डॉ. मानव कहते हैं कि यह वह स्थान है जहाँ पितरों का तर्पण पूरी श्रद्धा के साथ किया जाता है। यह गौतम बुद्ध और महावीर जैसे महापुरुषों की कर्मस्थली है, जिन्होंने पूरी दुनिया को शांति और मानवता का पाठ पढ़ाया। नालंदा और वैशाली जैसे प्राचीन गौरवशाली केंद्रों ने भारत को 'विश्वगुरु' बनाया। साथ ही, यह जयप्रकाश नारायण (जे.पी.) जैसे क्रांतिकारियों की भूमि है, जहाँ शांति और क्रांति का एक साथ जन्म होता है।
६. दक्षिण चरण पखारे रत्नाकर -----------।
------------------------- संतों की धरती है।
प्रस्तुत पंक्तियों में भारत माता की महिमा और उसकी विविधता का गौरवगान किया गया है। लेखक बताते हैं कि भारत का दक्षिणी भाग (समुद्र) इसके चरणों को धोता है और यह देश रत्नों की खान के समान मूल्यवान है। भारत के अलग-अलग राज्य अपनी विशिष्ट पहचान के लिए जाने जाते हैं; जैसे तमिलनाडु 'कम्ब रामायण' के ज्ञान से आलोकित है, तो केरल और आंध्र प्रदेश हमारी सभ्यता, संस्कृति और धर्म के रक्षक हैं। महाराष्ट्र की धरती वीर शिवाजी के साहस की गाथा गाती है, वहीं कर्नाटक की शीतल और सुगंधित हवाएँ (मलयज) मन को शांति प्रदान करती हैं। अंततः, भारत केवल एक भूखंड नहीं, बल्कि वीरों और संतों की पवित्र भूमि है, जहाँ वीरता और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
७. क्रीड़ास्थली प्रकृति की कर्नाटक----------।
-------------------------- संतों की धरती है।
कवि कर्नाटक की महानता का वर्णन करते हुए कहते हैं कि यह भूमि प्रकृति की अनुपम क्रीड़ास्थली है और भारत का सौभाग्य है। पूरे विश्व में भारत का मस्तक ऊँचा करने वाली इस धरती ने टीपू सुल्तान की शक्ति का लोहा पूरी दुनिया ने माना। साथ ही, कित्तूर की रानी चेन्नम्मा के बलिदान की अमर कहानियाँ यहाँ के कण-कण में रची-बसी हैं। कवि के अनुसार, भारतीयता का असली और सुंदर रूप कर्नाटक (कन्नड नाडू) की इस पावन मिट्टी में बखूबी निखर कर सामने आता है।
८. परम पुनीत नीर कावेरी, ------------।
----------------------संतों की धरती है।
अंतिम अंश में कवि कर्नाटक की पावन नदियों और संतों को याद करते हैं। वे कहते हैं कि कावेरी नदी का अत्यंत पवित्र जल कर्नाटक के मस्तक को सींचता है। यह वह भूमि है जहाँ महाकवि पम्प के दर्शन होते हैं और बसवेश्वर व अक्कमहादेवी जैसे महान समाज सुधारकों और संतों की वाणी आज भी गूँजती है। मेलकोटे जैसे पवित्र स्थानों पर रामानुजाचार्य के दर्शन अध्यात्म की गहराई को दर्शाते हैं। अंत में कवि स्पष्ट करते हैं कि धर्म, कर्म, साहित्य, कला और संस्कृति के मामले में कर्नाटक पूरे भारत का गौरव है और यह वीरों व संतों की वही महान धरती है जो देश का मान बढ़ाती है।
प्रश्नोंत्तर
( यहाँ ऐसे प्रश्नोंत्तर दिए हैं जो आपको एक बार पढ़ने से आसानी से समझ आएँगे और साथ ही परीक्षा में पूरे अंक भी प्राप्त होंगे।
I. एक शब्द या वाक्यांश या वाक्य में उत्तर लिखिए:
१. राम-कृष्ण की जन्म भूमि मन में क्या भरती है?
उत्तर: राम-कृष्ण की जन्म भूमि मन में आनंद और मंगल (मुद-मंगल) की भावना भरती है.
२. माखन का भोग कौन लगाते हैं?
उत्तर: माखन का भोग मनभावन कृष्ण कन्हैया लगाते हैं.
३. जनभाव में किसकी वाणी जैसा धीर है?
उत्तर: भजनभाव में गुरु नानक देव जी की वाणी जैसा धीरज (धीर) है.
४. हरा-भरा हरियाणा किनका स्थल है?
उत्तर: हरा-भरा हरियाणा अर्जुन, भीम और युधिष्ठिर जैसे धर्म-योद्धाओं का स्थल है.
५. इन्द्रपुरी किसके सामने पानी भरती है?
उत्तर: इन्द्रपुरी भारत की ऐतिहासिक नगरी इन्द्रप्रस्थ के सामने पानी भरती है (यानी नतमस्तक होती है).
६. राणा की हुंकार कहाँ सुनी जा सकती है?
उत्तर: राणा प्रताप की हुंकार राजस्थान की रेतीली धरती पर सुनी जा सकती है.
७. पितरों का तर्पण किस भूमि में होता है?
उत्तर: पितरों का तर्पण बिहार की पावन भूमि में होता है.
८. तमिलनाडु में रामायण का ज्ञान कौन दे रहा है?
उत्तर: तमिलनाडु में कम्ब रामायण (महाकवि कम्ब) रामायण का ज्ञान दे रहे हैं.
९. भारतीयता कहाँ बहु रूप में सँवरती है?
उत्तर: भारतीयता कन्नड नाडू (कर्नाटक) में कई सुंदर रूपों में सँवरती है.
१०. कर्नाटक में किस महाकवि के दर्शन कर सकते हैं?
उत्तर: कर्नाटक में हम महाकवि पम्प के दर्शन कर सकते हैं.
II. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए:
१. 'मानव' ने उत्तर प्रदेश की किन विशेषताओं का वर्णन किया है?
उत्तर: कवि ने उत्तर प्रदेश को भारत की सांस्कृतिक आत्मा बताया है। यहाँ प्रयाग, काशी और हरिद्वार जैसे महान तीर्थ स्थल हैं। साथ ही, यह कबीर, तुलसी और मलिक मोहम्मद जायसी जैसे महान कवियों की भूमि रही है, जिनकी वाणी ने समाज को नई दिशा दी।
२. पंजाब केसरी की महत्ता प्रकट कीजिए।
उत्तर: पंजाब को वीरों की धरती बताते हुए कवि ने लाला लाजपत राय (पंजाब केसरी) के स्वाभिमान और शक्ति का गुणगान किया है। यहाँ के लोग अपने दम पर अडिग रहना जानते हैं और युद्ध के मैदान में गुरु तेग बहादुर जैसे वीरों का बलिदान पंजाब की महानता को दर्शाता है।
३. हरियाणा की सांस्कृतिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: हरियाणा को कवि ने धर्म और कर्म का संगम माना है। यह अर्जुन, भीम और युधिष्ठिर जैसे योद्धाओं की कर्मस्थली रही है। यहाँ की हरियाली और वीर-पुरूषों का बल-पौरुष भारतीय सभ्यता का मजबूत आधार (सम्बल) माना जाता है।
४. राजस्थान की वीरता के संबंध में 'मानव' के क्या विचार हैं?
उत्तर: राजस्थान के लिए कवि के मन में गहरा सम्मान है। वे कहते हैं कि यहाँ की हल्दीघाटी की चट्टानों से आज भी स्वाभिमान की गूँज आती है। राणा प्रताप की हुंकार और 'सेनाणी' व 'जौहर' जैसी ऐतिहासिक त्याग की परंपराएँ राजस्थान को वीरों की जननी बनाती हैं।
५. बिहार राज्य की भव्यता का वर्णन कीजिए।
उत्तर: बिहार को कवि ने अध्यात्म और क्रांति का केंद्र माना है। यह वह भूमि है जहाँ गौतम बुद्ध और महावीर ने शांति का संदेश फैलाया। साथ ही, यह जयप्रकाश नारायण (जे.पी.) जैसे क्रांतिकारियों की धरती है, जहाँ से समाज में बड़े बदलाव की शुरुआत हुई।
६. दक्षिण प्रदेश की महत्ता को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर: दक्षिण भारत प्राकृतिक और सांस्कृतिक रूप से बहुत धनी है। यहाँ समुद्र भारत माता के चरणों को पखारता है। तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश अपनी प्राचीन सभ्यता और धर्म के रक्षक रहे हैं। महाराष्ट्र के संतों ने भी इस क्षेत्र को भक्ति के गीतों से सजाया है।
७. कर्नाटक के गौरवशाली इतिहास और संस्कृति के संबंध में 'मानव' के क्या उद्गार हैं?
उत्तर: कर्नाटक को कवि ने 'प्रकृति की क्रीड़ास्थली' और भारत का सौभाग्य कहा है। यहाँ टीपू सुल्तान का शौर्य और रानी चेन्नम्मा का बलिदान इतिहास में अमर है। बसवेश्वर, अक्कमहादेवी और रामानुजाचार्य जैसे संतों ने इसे आध्यात्मिक ऊँचाई दी है, जिससे कर्नाटक पूरे देश का मान बढ़ाता है।
III. ससंदर्भ भाव स्पष्ट कीजिए :
१. वेद और उपनिषद् ज्ञान गीता का तत्व प्रदाता है। सरस्वती सरिता तट वैदिक मंत्रों का उद्गाता है॥ हरित-भरित हरियाणा, अर्जुन, भीम, युधिष्ठिर का स्थल है। धर्म-कर्म-संस्कृति-सभ्यता, बल-पौरुष का सम्बल है॥
संदर्भ: ये काव्य पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक 'साहित्य वैभव' के 'भारत की धरती' नामक पाठ से ली गई हैं। इसके रचयिता प्रसिद्ध कवि डॉ. पुण्यमचन्द 'मानव' हैं।
भावार्थ: इन पंक्तियों में कवि ने भारत की ज्ञान-परंपरा और हरियाणा के ऐतिहासिक गौरव का वर्णन किया है। कवि कहते हैं कि भारत वह महान भूमि है जिसने दुनिया को वेद, उपनिषद और गीता जैसा शाश्वत ज्ञान दिया है। प्राचीन काल में सरस्वती नदी के तट पर ही वैदिक मंत्रों की रचना हुई थी। आगे कवि हरियाणा की महिमा गाते हुए कहते हैं कि यह वीरों और धर्म-योद्धाओं (अर्जुन, भीम और युधिष्ठिर) की पावन कर्मभूमि है। यहाँ की संस्कृति और लोगों का साहस पूरे देश के लिए शक्ति का आधार है।
२. परम पुनीत नीर कावेरी, मस्तक धर कर्नाटक में। पम्प महाकवि के दर्शन, कर लो चलकर कर्नाटक में॥ बसवेश्वर या अक्कमहादेवी कर्नाटक में गाते। रामानुज आचार्य 'मेलकोटे' में दर्शन दे जाते॥
संदर्भ: ये पंक्तियाँ 'भारत की धरती' कविता से ली गई हैं, जिसके कवि डॉ. पुण्यमचन्द 'मानव' हैं।
भावार्थ: यहाँ कवि ने कर्नाटक (कन्नड नाडू) की आध्यात्मिक और साहित्यिक महानता का सुंदर चित्रण किया है। कवि कहते हैं कि कावेरी नदी का अत्यंत पवित्र जल कर्नाटक की धरती को सींचता है और इसे पावन बनाता है। यह वह भूमि है जहाँ महाकवि पम्प जैसे विद्वानों ने जन्म लिया। कर्नाटक संतों की भी भूमि रही है, जहाँ बसवेश्वर और अक्कमहादेवी के भक्तिपूर्ण वचन आज भी गूँजते हैं। साथ ही, मेलकोटे जैसे तीर्थ स्थल पर स्वामी रामानुजाचार्य की दिव्य उपस्थिति महसूस की जा सकती है। कवि के अनुसार, कर्नाटक धर्म और कला का वह अनूठा संगम है जो पूरे भारत का गौरव बढ़ाता है।
निष्कर्ष:
डॉ. पुण्यमचन्द 'मानव' जी की यह कविता केवल शब्दों का मेल नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक भव्यता का जीवंत चित्र है। इस पाठ के माध्यम से हमें यह समझने को मिलता है कि भारत की असली शक्ति उसकी 'विविधता में एकता' है। जहाँ एक ओर उत्तर भारत की नदियाँ और हिमालय हमें अडिग रहना सिखाते हैं, वहीं दक्षिण भारत का आध्यात्मिक वैभव और कर्नाटक की चंदन जैसी शीतल संस्कृति हमारे जीवन में मिठास भरती है。
यह कविता छात्रों को न केवल उनकी महान विरासत से परिचित कराती है, बल्कि उनके भीतर राष्ट्रभक्ति और गौरव का संचार भी करती है。 चाहे वह राजस्थान का शौर्य हो, बिहार की शांति-क्रांति हो या पंजाब का स्वाभिमान—भारत की यह पावन मिट्टी हर कदम पर हमें महान बनने की प्रेरणा देती है。
कठिन शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ (सरल हिन्दी में) |
| मुद-मंगल | आनंद और कल्याण |
| उद्गार | मन के भाव या विचार |
| दर्प-दलन | घमंड को चूर करना |
| उद्गाता | मंत्रों का गान करने वाला |
| सम्बल | सहारा या आधार |
| नीर | जल या पानी |
| पुनीत | बहुत पवित्र |
| मलयज | चंदन की सुगंध वाली हवा |
| अनुरवर्ती | पीछे चलने वाला या अनुसरण करने वाला |
| जगती | संसार या दुनिया |