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Raidasbani (Sahitya Gaurav) PUC-2nd Year/Karnataka board/ Summary & Question/Answer (रैदासबानी भावार्थ... साहित्य गौरव)

                                                                             रैदासबानी

                                                                                    रैदास

कवि परिचय :

   रैदास का जन्म- 1388 में  और मृत्यु 1518 में बनारस में हुई।  

   * 130 साल की आयु प्राप्त की       

   * भक्तिकाल के निर्गुण कवि 

    * कबीरदास की तरह शास्त्रीय ज्ञान की जगह अनुभव ज्ञान को महत्व

    * निर्गुण राम की पूजा की।

     * पदों में दास्य भाव दिखाई देते हैं।


पद :

१) अब कैसे छुटे राम नाम रट लगी।

प्रभु जी तुम चंदन हम पानी,

जाकी अंग-अंग बास समानी। 

प्रभु जी तुम घन बन, हम मोरा

जैसे चितवत चंद चकोरा।

प्रभु जी तुम दीपक, हम बाती,

जाकी जोति बैरै दिन राती।

प्रभु जी तुम मोती, हम धागा,

जैसे सोने मिलत सुहागा।

प्रभु जी तुम स्वामी हम दासा

ऐसी भगति करै रैदासा॥१॥

भावार्थ : रैदास ने उपर्युक्त पद में अपने और अपने प्रभु राम के बीच के संबंधों का वर्णन किया है। रैदास को राम नाम की रट लगी हुई है। इस रट को वे छुड़ाना चाहते हैं फ़िर भी नहीं छुड़ा पा रहे हैं। उनके मुँह से सतत राम नाम आ रहा है। उन्होंने अपने प्रभु को चंदन और अपने आप को पानी माना है। पानी की कोई सुगंध नहीं होती है। लेकिन वही पानी चंदन में मिलने के बाद उससे चंदन की खुशबू निकलती है। वैसे ही भक्त जब भगवान के संपर्क में आता है तो वह भक्तिमय हो जाता है। उसके रोम-रोम से राम रुपी चंदन की खुशबू निकलती है। 

रैदास ने अपने प्रभु को घन (बादल) और अपने आपको मोर माना है। आसमान में घिरे बादलों को देखकर मोर खुशी से नाचने लगता है, वैसे ही अपने प्रभु के दर्शन पाकर रैदास या भक्त खुशी से नाचने लगता है। चकोर पक्षी चाँद को देखकर अपनी प्यास बुझाता है वैसे ही अपने प्रभु के दर्शन पाकर रैदास भक्ति की प्यास बुझाता है। 

रैदास ने अपने प्रभु को दीपक और अपने आप को बाती माना है। दीपक और बाती के मिलन से ज्योति दिन-रात प्रज्वलित होती है और चारों ओर प्रकाश फ़ैलता है, वैसे ही भगवान और भक्त के मिलन से भक्तिरुपी प्रकाश दुनिया में फ़ैलता है। दीपक और बाती एक-दूसरे के बिना जैसे अधूरे हैं, वैसे ही भगवान और भक्त एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं।

रैदास ने अपने प्रभु को मोती और अपने आप को धागा माना है। मोती धागे में पिरोने से मोतियों की माला बनती है और मोती गले में चमकदार दिखते हैं। मोती के साथ धागा जुड़ने पर ही धागा मूल्यवान बनता है। वैसे ही भगवान की भक्ति करने से भक्त महान होता है और भक्त द्वारा भगवान की भक्ति करने से भगवान का अस्तीत्व बना रहता है। भगवान और भक्त दोनों एक-दूसरे के साथ रहने से मोतियों की माला के समान सुंदर दिखते हैं। सुहागे (द्रवीय पदार्थ) में डूबने के बाद सोना जैसे अधिक चमकने लगता है वैसे ही भक्त का जीवन भगवान की भक्ति में डूबने के बाद ही सोने की तरह चमकदार होता है।

रैदास ने अपने प्रभु को अपना स्वामी और स्वयं को दास माना है। वे कहते हैं कि वे अपने प्रभु के दास बनकर उनकी सेवा करना चाहते हैं। ऐसी भक्ति सिर्फ़ रैदास ही कर सकते हैं।


पद :

२) रैदास श्रम करि खाइहि,

जो लौ पार बसाय।

नेक कमाई जौ करइ,

कबहुँ न निहफ़ल जाय॥२॥

भावार्थ : रैदास इस पद द्वारा परिश्रम का महत्व समझाते हैं। जो परिश्रम करके खाता है वह हर अपना जीवन अच्छी तरह से बिताता है। श्रम करने वाला जीवन में सफ़ल होता है। जो नेक या ईमानदारी से कमाता है उसकी मेहनत कभी-भी निष्फ़ल नहीं जाती है। इसलिए जीवन में ईमानदारी से परिश्रम करना चाहिए।

पद :

३) ऐसा चाहो राज में,

जहाँ मिले सबन को अन्न।

छोटा-बड़ा सभ सम बसै,

रैदास रहै प्रसन्न ॥३॥

भावार्थ : रैदास इस पद में ऐसे राज्य की कामना करते हैं जहाँ समाज का हित हो। राज्य में हर एक को खाने के लिए अन्न मिले। कोई भी भूखा ना सोये। सबको समाज में समान नज़र से देखा जाए। छोटा-बड़ा या अमीर-गरीब यह भेदभाव नहीं होना चाहिए। समाज में यह भेदभाव रहने से समाज की उन्नति नहीं होती। सभी प्रसन्नता से जीवन बिता सके, रैदास ऐसे राज्य की कामना करते हैं।


प्रश्नोंत्तर :

I.एक शब्द या वाक्यांश में या वाक्य में उत्तर लिखिए :

1. रैदास किसकी रट लगाए हुए हैं?

उत्तर- रैदास अपने प्रभु राम की रट लगाए हुए हैं।

2. अंग-अंग में किसकी सुगंध समा गई है?

उत्तर- अंग-अंग में राम रुपी चंदन की सुगंध समा गई है।  

3. चकोर पक्षी किसे देखता रहता है?

उत्तर- चकोर पक्षी चाँद को देखता रहता है।

4. रैदास अपने आपको किसका सेवक मानते हैं?

उत्तर- रैदास अपने आप को अपने प्रभु राम का सेवक मानते हैं।

5. रैदास किस प्रकार जीवन का निर्वाह करने के लिए कहते हैं?

उत्तर- रैदास श्रम करके जीवन का निर्वाह करने के लिए कहते हैं।

6. रैदास के अनुसार कभी भी क्या निष्फ़ल नहीं जाता?

उत्तर- रैदास के अनुसार नेकी से की गई कमाई कभी भी निष्फ़ल नहीं जाती।

7. रैदास किस राज्य की कामना करते हैं?

उत्तर- रैदास सबको खाने के लिए अन्न मिले ऐसे राज्य की कामना करते हैं।


II निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

1.  रैदास ने भगवान और भक्त के संबंध को कैसे वर्णित किया है?

उत्तर- रैदास ने भगवान और भक्त के संबंध को निम्नप्रकार से वर्णित किया है-

           * भगवान चंदन है तो भक्त पानी है।   

           *  भगवान घन है तो भक्त मोर है।

           * भगवान चाँद है तो भक्त चकोर हैं।

           * भगवान दीपक है तो भक्त बाती है।

           * भगवान मोती है तो भक्त धागा है।

           * भगवान सुहागा है तो भक्त सोना है।

           * भगवान प्रभु है तो भक्त दास है।


 2. परिश्रम के महत्व के प्रति रैदास के क्या विचार हैं?

उत्तर- रैदास परिश्रम का महत्व बताते हुए विचार व्यक्त करते हैं कि जो श्रम या मेहनत करके खाता है वह जिंदगी में हमेशा सफ़ल होता है। श्रम करके खाने वाले पर कभी भी भूखा रहने या सोने की नौबत नहीं आती है। साथ ही जो नेक तथा ईमानदारी से कमाई करता है, उसकी मेहनत कभी भी निष्फ़ल नहीं जाती है। नेकी से किया गया कार्य हमेशा सराहनीय होता है।

 3. रैदास ने किस प्रकार के राज्य का वर्णन किया है?

उत्तर- रैदास ऐसे राज्य का वर्णन करते हैं जिसमें सब को खाने के लिए अन्न मिले। राज्य का कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे। साथ ही राज्य में सभी लोगों को समान अधिकार मिलना चाहिए। राज्य में अमीर-गरीब या ऊँच-नीच का भेदभाव देखने को नहीं मिलना चाहिए। ऐसे राज्य को देखने में उन्हें प्रसन्नता होती है।


III संदर्भ भाव स्पष्ट कीजिए :

1.  अब कैसे छूटै राम नाम रट लागी।

     प्रभु जी तुम चंदन हम पानी,

     जाकि अंग-अंग बास समानी।

प्रसंग : प्रस्तुत दोहा कक्षा ११ वीं की पाठ्यपुस्तक ‘साहित्य वैभव’ के मध्ययुगीन काव्य के ‘रैदासबानी’ से ली हैं, जिसके कवि रैदास हैं।

संदर्भ : रैदास ने अपने और अपने प्रभु के बीच के अंतर को उदहारणों के माध्यम से अपनी राम भक्ति को दर्शाया है।

भाव स्पष्टिकरण : रैदास की इन पंक्तियों का भाव है कि रैदास को अपने प्रभु राम के नाम की रट लगी हुई है, जिसे वे छुड़ाना चाहते हैं लेकिन छुड़ा नहीं पाते। उनके मुँह से सतत अपने प्रभु राम का नाम आ रहा है। रैदास अपने प्रभु को चंदन मानते हैं तो अपने आप को पानी। पानी में चंदन मिलने से पानी से भी चंदन की खुशबू निकलती है। ठीक वैसे ही रैदास के रोम-रोम से राम रुपी चंदन की खुशबू निकल रही है। अर्थात रैदास के मुँह से राम नाम निकल रहा है। 


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Raidasbani PUC 2nd Year/ Full Explanation/Full Marks

 

 



                                                                                

 



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